डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर होगा नोबेल प्राइज? अमेरिकी सीनेटर के इस अतरंगे बयान ने मचाई खलबली, जानिए पीछे की पूरी कहानी
मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और तेज हो गई है. बंदर अब्बास पर अमेरिकी बमबारी के तुरंत बाद ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर बड़ा हमला बोल दिया है. इस भयंकर सैन्य टकराव से पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच वैश्विक राजनीति की हलचल तेज हो गई है. हाल ही में बंदर अब्बास पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाए जाने के बाद इस पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है.
सुलगती आग और युद्ध का माहौल
इस सुलगती आग और युद्ध के माहौल के बीच अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक प्रयासों को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुलकर ट्रंप की तारीफ करते हुए एक बेहद चौंकाने वाली मांग कर दी है.
ट्रंप को ना कहना पड़ सकता है भारी
फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब को इजरायल के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते और उसे मान्यता देने के लिए राजी कर लेते हैं तो इसके सम्मान में 'नोबेल प्राइज' का नाम बदलकर 'ट्रंप प्राइज' कर दिया जाना चाहिए. ग्राहम ने अमेरिका के अरब सहयोगियों को नसीहत दी कि उन्हें इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप की मदद करनी चाहिए, क्योंकि ट्रंप को ‘ना’ कहना किसी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है.
ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट को हल करने के लिए ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को 'अब्राहम अकॉर्ड' के विस्तार से जोड़कर देख रहे हैं. ट्रंप ने स्पष्ट रूप से सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र जैसे प्रमुख मुस्लिम बहुल देशों से अपील की है कि वे इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य करने वाले इस समझौते का हिस्सा बनें.
ट्रंप ने क्या कहा
खाड़ी देशों को कड़ा संदेश देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन मुल्कों को तुरंत इस संधि पर हस्ताक्षर करने चाहिए, क्योंकि वे अमेरिका के प्रति यह जिम्मेदारी निभाने के कर्जदार हैं. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि खाड़ी देश इस ऐतिहासिक समझौते से पीछे हटते हैं तो अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने शांति प्रयासों और सौदों को सीमित कर सकता है. इस कूटनीतिक मिशन को अमलीजामा पहनाने के लिए ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर लगातार पर्दे के पीछे सक्रिय हैं.
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
अब्राहम अकॉर्ड की नींव साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान रखी गई थी. इस समझौते का नाम पैगंबर इब्राहिम के नाम पर साझा विरासत के प्रतीक के रूप में रखा गया है जिन्हें यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों ही धर्मों में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है. इस संधि का मुख्य उद्देश्य इजरायल और अरब जगत के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर आर्थिक और राजनयिक संबंध बहाल करना है.
मिडिल ईस्ट का इतिहास
इस समझौते के तहत सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ हाथ मिलाया था जिसके बाद मोरक्को और सूडान भी इस कड़ी में शामिल हुए. अमेरिका का मानना है कि 1979 में मिस्र और 1994 में जॉर्डन के साथ हुई संधियों के बाद यह मिडिल ईस्ट के इतिहास का सबसे बड़ा शांति प्रयास है. जिसके सफल होने पर पूरे क्षेत्र में व्यापार, तकनीक और सुरक्षा का एक नया ढांचा खड़ा होगा.


