‘ग्रेटर अमेरिका’ का संकेत? ट्रंप की AI इमेज से बढ़ी कनाडा की चिंता, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला भी असहज

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक AI-जनरेटेड तस्वीर साझा की गई जिसमें कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे के रंग में दिखाया गया है. इसने विस्तारवादी इरादों की आशंका बढ़ा दी है. इस पर कनाडा की चिंता खुलकर सामने आई है.

Shraddha Mishra

ओटावा (कनाडा): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे के रंग में दिखाया गया है. इस तस्वीर ने कई देशों को असहज कर दिया है, खासतौर पर कनाडा को, जो इसे अमेरिका के विस्तारवादी इरादों के संकेत के रूप में देख रहा है.

वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का सख्त रुख

इस तस्वीर की पृष्ठभूमि और भी गंभीर है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर दावा किया जा रहा है कि उन्हें अमेरिकी सेना पकड़कर अमेरिका ले आई है और वहां उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है. वहीं ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका पहले ही खुलकर दावा जता चुका है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने न सिर्फ ग्रीनलैंड को हासिल करने की बात कही है, बल्कि वहां के लोगों को प्रति व्यक्ति एक लाख अमेरिकी डॉलर तक देने का लालच भी दिया गया है. यहां तक कि जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग के संकेत भी दिए गए हैं.

कनाडा की बढ़ती चिंता

इन घटनाओं और बयानों के बीच कनाडा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि कनाडा को "ग्रेटर अमेरिका" का हिस्सा बनना चाहिए. इसी वजह से कनाडा की चिंता अब खुलकर सामने आने लगी है. दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बिना किसी देश का नाम लिए अमेरिका की नीतियों पर कड़ा संदेश दिया.

दावोस में मार्क कार्नी का स्पष्ट संकेत

मार्क कार्नी ने कहा कि मौजूदा समय में कुछ देश आर्थिक सहयोग को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. टैरिफ को दबाव बनाने का जरिया बना दिया गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम ताकत वाले देशों को एकजुट होकर काम करना चाहिए, क्योंकि अगर वे फैसले की मेज पर नहीं होंगे तो फिर वे फैसलों का शिकार बनेंगे. उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की टैरिफ और व्यापार नीति की ओर इशारा करता है.

कनाडा की चिंता सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है. उसने अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के लिए करीब एक अरब डॉलर खर्च किए हैं. इसके अलावा आने वाले वर्षों में उत्तरी सीमा की सुरक्षा पर भी अरबों डॉलर लगाने की योजना है. माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को लेकर अमेरिका के रुख ने कनाडा को सतर्क कर दिया है और वह किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयारी कर रहा है.

ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के साथ खड़ा कनाडा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कनाडा ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन का भी ऐलान किया है. मार्क कार्नी ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क के पास है. कनाडा उनके साथ खड़ा है. उन्होंने यह भी बताया कि देश अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश कर रहा है.

नई साझेदारियों की तलाश

अब कनाडा चीन, रूस और भारत जैसे देशों से भी सहयोग बढ़ाने की बात कर रहा है. उसका मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में समान सोच वाले देशों का साथ आना बेहद जरूरी है. ट्रंप की नीतियों और संकेतों ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां ताकतवर देश खुलकर दबाव की रणनीति अपना रहे हैं.

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