ईरान में सत्ता पलटने की तैयारी? पेंटागन के प्लान से बढ़ी खामेनेई की मुश्किलें
ईरान को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन द्वारा तैयार किए गए एक कथित प्लान ने अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बीच खामेनेई के अंडरग्राउंड होने की खबरों ने चर्चाओं को और हवा दे दी है.

नई दिल्ली: ईरान की राजनीति एक बार फिर वैश्विक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है. अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार को हटाने से जुड़ा एक अहम प्लान तैयार कर लिया है. यह योजना जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पेश की जा सकती है.
बताया जा रहा है कि इस योजना को पेंटागन और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर तैयार किया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 जनवरी को हुई एक हाईलेवल मीटिंग में अधिकारियों को ईरान को लेकर निर्णायक रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए थे.
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में क्या दावा?
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल ईरान में हालात शांत बताए जा रहे हैं और सरकार ने सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर काबू पा लिया है. इसके बावजूद पेंटागन के अधिकारी ईरान को लेकर लगातार रणनीतिक मंथन कर रहे हैं.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कई दौर की मशक्कत के बाद पेंटागन ने ईरान को लेकर एक ठोस प्लान तैयार कर लिया है.
पेंटागन के प्लान में क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के कुछ ठिकानों पर हमला शामिल है. यह प्लान हवाई और जमीनी, दोनों तरह की सैन्य कार्रवाई को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड को बेहद ताकतवर संगठन माना जाता है. इसके पास करीब 1.5 लाख सक्रिय सदस्य हैं, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी इस्लामिक गणराज्य की व्यवस्था को बनाए रखना है.
खामेनेई के अंडरग्राउंड होने से बढ़ी हलचल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंडरग्राउंड होने की खबरें हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई को आखिरी बार 17 जनवरी को सार्वजनिक रूप से देखा गया था.
इसके बाद से वे अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं. इससे पहले जून 2025 में भी सुरक्षा कारणों के चलते खामेनेई को अंडरग्राउंड किया गया था.
ईरान में तख्तापलट की कोशिश क्यों?
ईरान मिडिल ईस्ट का एक बेहद अहम देश है. यहां दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल और नेचुरल गैस भंडार मौजूद हैं. इसके अलावा, ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है.
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है. 1979 के बाद से ईरान पर अमेरिका का सीधा प्रभाव खत्म हो गया था, जिसे अमेरिका दोबारा हासिल करना चाहता है.
खामेनेई और अमेरिका की दुश्मनी
वर्तमान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका के कट्टर विरोधी माने जाते हैं. कई मौकों पर वे अमेरिका पर सीधे हमलावर रहे हैं.
मिडिल ईस्ट के देशों का यह भी आरोप है कि ईरान प्रॉक्सी संगठनों के जरिए पूरे इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता है. हिजबुल्लाह, हमास और हूती को ईरान के प्रमुख प्रॉक्सी संगठन माना जाता है.
ईरान में तख्तापलट क्यों नहीं है आसान?
ईरान की शासन व्यवस्था बेहद जटिल है. एक ओर सुप्रीम लीडर के पास सेना और न्यायपालिका से जुड़े सभी अधिकार हैं, वहीं दूसरी ओर देश में राष्ट्रपति चुने जाते हैं, जिनकी जिम्मेदारी आर्थिक नीतियों और प्रशासन को संभालने की होती है.
इसके अलावा, ईरान में कैबिनेट और संसद की भी मजबूत व्यवस्था है. ऐसे में सिर्फ खामेनेई को हटाकर तख्तापलट करना आसान नहीं माना जाता.


