ग्रीन कार्ड पाने के लिए रची फर्जी डकैती, अमेरिका में 11 भारतीयों पर वीजा फ्रॉड का आरोप

अमेरिका में 11 भारतीय नागरिकों पर U Visa पाने के लिए दुकानों में नकली डकैती की साजिश रचने का आरोप लगा है. जांच के मुताबिक, वे खुद को अपराध का पीड़ित दिखाकर ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते थे.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन लोगों ने स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने के लिए एक अजीब तरीका अपनाया.

आरोप है कि उन्होंने दुकानों में हथियारों के बल पर फर्जी डकैती का नाटक रचकर खुद को अपराध का पीड़ित दिखाने की कोशिश की, ताकि उन्हें विशेष श्रेणी का वीजा मिल सके. यह मामला फिलहाल जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया के तहत है और इससे अमेरिका में अवैध प्रवास और वीजा धोखाधड़ी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

U Visa पाने के लिए रची गई साजिश

अधिकारियों के अनुसार इस पूरी योजना का उद्देश्य U Visa हासिल करना था. यह वीजा उन प्रवासियों को दिया जाता है जो किसी अपराध के शिकार होते हैं और पुलिस जांच में सहयोग करते हैं. इस वीजा के तहत व्यक्ति को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है और कुछ वर्षों बाद वह स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) के लिए आवेदन कर सकता है.

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इसी नियम का फायदा उठाने के लिए नकली डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया. योजना के तहत स्टोर में काम करने वाले लोग खुद को अपराध का शिकार दिखाकर U Visa के लिए आवेदन करना चाहते थे.

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

इस मामले में जिन 11 भारतीय नागरिकों पर आरोप लगे हैं, उनमें जितेंद्रकुमार पटेल, महेशकुमार पटेल, संजयकुमार पटेल, दीपिकाबेन पटेल, रमेशभाई पटेल, अमिताबेन पटेल, रौनककुमार पटेल, संगीताबेन पटेल, मिंकेश पटेल, सोनल पटेल और मितुल पटेल शामिल हैं. बताया गया है कि ये सभी लोग मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहियो जैसे राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे. इनमें से दीपिकाबेन पटेल को मैसाचुसेट्स के वेमाउथ इलाके से गिरफ्तार किए जाने के बाद भारत वापस भेज दिया गया है.

जितेंद्रकुमार, महेशकुमार, संजयकुमार, अमिताबेन, संगीताबेन और मितुल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया था. बाद में उन्हें बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किया गया और फिलहाल रिहा कर दिया गया है. बाकी आरोपियों को केंटकी, मिसौरी और ओहियो में पकड़ा गया है और उन्हें भी आगे चलकर बोस्टन की अदालत में पेश किया जाएगा.

कैसे रची गई फर्जी डकैती की योजना

जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता “रामभाई” नाम का व्यक्ति था. आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर मार्च 2023 के आसपास कई जगहों पर नकली डकैती की घटनाएं कराईं. इस योजना के तहत मैसाचुसेट्स और अन्य इलाकों में कम से कम छह सुविधा दुकानों, शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां को निशाना बनाया गया.

घटनाओं के दौरान एक व्यक्ति नकली लुटेरे की भूमिका निभाता था. वह सीसीटीवी कैमरों के सामने बंदूक या बंदूक जैसी दिखने वाली वस्तु दिखाकर कैशियर को डराता और कैश काउंटर से पैसे लेकर भाग जाता था. इसके बाद कुछ समय बीतने के बाद स्टोर में मौजूद कर्मचारी या मालिक पुलिस को फोन करके घटना की जानकारी देते थे, ताकि यह असली अपराध जैसा लगे.

पैसे के बदले रची गई पूरी साजिश

जांच में यह भी सामने आया कि इस योजना में शामिल होने के लिए कई कथित पीड़ितों ने आयोजक रामभाई को पैसे दिए थे. इसके बदले में रामभाई ने कुछ दुकानदारों को भी भुगतान किया ताकि वे अपनी दुकानों को इस फर्जी डकैती के लिए इस्तेमाल करने दें. इस पूरे ऑपरेशन में नकली लुटेरा, ड्राइवर और अन्य सहयोगी भी शामिल थे. अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है.

 हो सकती है पांच साल की जेल

अमेरिकी कानून के तहत वीजा धोखाधड़ी की साजिश एक गंभीर अपराध माना जाता है. यदि आरोप साबित हो जाते हैं तो दोषियों को अधिकतम पांच साल की जेल हो सकती है. इसके अलावा तीन साल की निगरानी और लगभग 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है. जांच एजेंसियां इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि और लोग इस साजिश में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

अवैध प्रवास और वीजा नियमों पर बढ़ी बहस

इस घटना के सामने आने के बाद अमेरिका में वीजा नियमों और आव्रजन प्रणाली को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं आव्रजन व्यवस्था के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं. वहीं कानून प्रवर्तन एजेंसियां यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके और दोषियों को सख्त सजा मिले.

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