ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गैरकानूनी, लेकिन अमेरिका की जमकर हुई कमाई...आंकड़े जान हैरान रह जाएंगे आप
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का गलत उपयोग किया है, लेकिन ट्रंप के गलत नीति से अमेरिका को एक साल में खरबों की कमाई हुई है. आइए जानते है इस खबर को विस्तार से...

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी महत्वाकांक्षी व्यापारिक नीतियों पर अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका लगा है. देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके द्वारा लागू किए गए 'टैरिफ अटैक' को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के नेतृत्व में 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र रूप से ऐसे व्यापक शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इस आदेश के बाद ट्रंप के आर्थिक ब्लूप्रिंट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
इमरजेंसी शक्तियों का दुरुपयोग
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ थोपने के लिए 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) का सहारा लिया, जो तकनीकी रूप से गलत था. इस कानून का उपयोग केवल तब किया जा सकता है जब देश में वास्तविक राष्ट्रीय आपातकाल हो. कोर्ट ने साफ किया कि ट्रंप ने बिना किसी संकट के व्यापारिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल किया. चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को टैक्स लगाने की असीमित शक्तियां नहीं दी जा सकतीं.
टैरिफ से अमेरिकी खजाने में उछाल
भले ही कोर्ट ने इस कदम को अवैध ठहराया हो, लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि ट्रंप के इस 'टैरिफ अटैक' से अमेरिकी खजाने को जबरदस्त फायदा हुआ. साल 2025 के दौरान अमेरिका को टैरिफ से रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ. आंकड़ों के मुताबिक, इस साल राजस्व लगभग 195 अरब डॉलर से 217 अरब डॉलर के दायरे में रहा. राष्ट्रपति के पद संभालने के बाद से ही टैरिफ के जरिए राजस्व में तूफानी उछाल देखा गया था, जिसने बजट के कई पुराने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया था.
राजस्व संग्रह का ऐतिहासिक तुलनात्मक डेटा
अगर हम पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो पता चलता है कि 2025 में टैरिफ से होने वाली कमाई ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. साल 2016 में यह केवल 33 अरब डॉलर था और 2024 तक यह 77 अरब डॉलर के स्तर पर था. लेकिन ट्रंप के आक्रामक रुख के बाद इसमें अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई. रिपोर्ट की मानें तो अकेले IEEPA के तहत ही 175 अरब डॉलर से अधिक की भारी राशि एकत्र की गई थी, जिसने सरकारी खजाने को एक बड़ी मजबूती प्रदान की थी.
ट्रंप ने 2 अप्रैल को लगाया था रेसिप्रोकल टैरिफ
ट्रंप ने 2 अप्रैल को दुनिया भर के तमाम देशों पर अपनी शर्तों के अनुसार 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाने का बड़ा ऐलान किया था. इस फैसले से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड वॉर की स्थिति पैदा हो गई थी, बल्कि कूटनीतिक संबंधों में भी तनाव आ गया था. ट्रंप का मुख्य उद्देश्य अगले एक दशक में खरबों डॉलर की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना था. हालांकि, कोर्ट के ताजा फैसले ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और वैश्विक व्यापारिक साझेदारों को एक बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है.
आर्थिक एजेंडे को लगा तगड़ा झटका
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले ने ट्रंप प्रशासन की आगामी आर्थिक योजनाओं को गहरे संकट में डाल दिया है. राजस्व का एक बड़ा हिस्सा जो टैरिफ से आ रहा था, अब कानूनी रूप से अवैध हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार की खर्च करने की क्षमता और बजट संतुलन पर विपरीत असर पड़ सकता है. ट्रंप का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब कानूनी लड़ाई की भेंट चढ़ गया है, जिससे भविष्य में टैरिफ नीतियों को लेकर संसद की मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाएगा.


