अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द, बताया गैरकानूनी...क्या भारत पर लगेगा जीरो टैरिफ ?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को 6-3 के बहुमत से रद्द कर दिया है. इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है और वे अब अरबों डॉलर के रिफंड का दावा कर सकेंगे.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों पर न्यायिक रोक लगा दी है. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के फैसले में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति के पास 1977 के आईईईपीए कानून के तहत टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है. यह निर्णय भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. जिसके टेक्सटाइल और फार्मास्युटिकल जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र भारी शुल्क के बोझ तले दबे थे. अब भारतीय निर्यातक एक स्थिर और कम शुल्क वाले माहौल में व्यापार बढ़ा सकेंगे.

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने अपने 6-3 के बहुमत वाले फैसले में राष्ट्रपति की उन शक्तियों को चुनौती दी है. जिनका उपयोग ट्रंप ने व्यापार असंतुलन दूर करने के नाम पर किया था. आईईईपीए के तहत लगाए गए टैरिफ को अमान्य घोषित करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि व्यापारिक नीतियां तय करने में विधायी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है. हालांकि. स्टील और एल्यूमिनियम पर लगे पुराने टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे. क्योंकि वे अलग कानूनों के अधीन आते हैं और उन पर यह फैसला लागू नहीं होता है.

भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत

भारत के लिए यह फैसला संजीवनी की तरह है. अप्रैल 2025 में घोषित 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ अब पूरी तरह कानूनी तौर पर अमान्य हो गया है. इससे भारतीय इंजीनियरिंग गुड्स. फार्मा और कपड़ा उद्योग पर से अतिरिक्त वित्तीय बोझ काफी कम होगा. फरवरी 2026 में हुए समझौते के बाद रूसी तेल पर लगी पेनल्टी पहले ही हट चुकी थी. अब इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना फिर से आसान और काफी किफायती होने की पूरी उम्मीद है.

भारतीय कंपनियों के लिए रिफंड का मौका 

इस न्यायिक आदेश का एक बड़ा सकारात्मक पहलू अरबों डॉलर का वह रिफंड है. जिसे भारतीय कंपनियों ने पिछले महीनों में टैरिफ के रूप में भुगतान किया था. अब वे कानूनी तौर पर इस भारी राशि की वापसी के लिए मजबूती से दावा कर सकती हैं. यह न केवल कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारेगा. बल्कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही भविष्य की व्यापार वार्ताओं को भी नई गति प्रदान करेगा. नई दिल्ली को अब व्यापारिक मेज पर बेहतर शर्तों पर बातचीत का अवसर मिलेगा.

राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगाम

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का उपयोग मनमाने ढंग से व्यापारिक शुल्क लगाने के लिए नहीं कर सकते. इस फैसले ने राष्ट्रपति की व्यापार शक्तियों पर न्यायिक जांच का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है. ट्रंप प्रशासन को अब अपनी नीतियों के लिए कांग्रेस की भूमिका और अन्य वैकल्पिक कानूनों जैसे सेक्शन 232 या 301 का सहारा लेना होगा. जहां उन्हें राजनीतिक और कानूनी तौर पर अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा. इससे संरक्षणवादी नीतियों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी.

भविष्य के व्यापारिक समीकरण

भले ही सभी टैरिफ पूरी तरह जीरो नहीं होंगे. लेकिन अधिकांश सामानों पर अब पुराने और कम बेसलाइन टैरिफ ही लागू होंगे. स्टील और एल्यूमिनियम जैसे सेक्टर अभी भी प्रभावित रहेंगे. जो कुल द्विपक्षीय व्यापार का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा है. फिर भी. यह फैसला वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने वाला है. भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक सकारात्मक वातावरण तैयार करेगा. जिससे वे कम अनिश्चितता और स्थिर माहौल में अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में तेजी से बढ़ सकेंगे.

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