एक तरफ धमकी, दूसरी तरफ राहत... ट्रंप की रूस नीति ने दुनिया को चौंकाया
अलास्का में शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक बेहद अहम और रोमांचक मीटिंग होने वाली है. इस मुलाकात पर न सिर्फ अमेरिका और रूस, बल्कि पूरी दुनिया की नजर टिकी है, क्योंकि इसके नतीजे वैश्विक मंच पर बड़ा असर डाल सकते हैं.

Trump-Putin Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को चेतावनी दी है कि अगर उसने यूक्रेन में शांति बहाल करने में बाधा डाली तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. यह बयान उस समय आया है जब शुक्रवार को ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में अहम मीटिंग होने जा रही है. खास बात यह है कि इस मीटींग से ठीक पहले अमेरिका ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है, ताकि वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा सके. अमेरिकी प्रशासन के इस कदम को दोनों नेताओं को एक टेबल पर लाने और भविष्य से जुड़े अहम फैसले लेने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.
मीटिंग से पहले हटाए गए प्रतिबंध
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाकर 20 अगस्त तक मीटींग से संबंधित गतिविधियों की अनुमति दी गई है. ऑफिस ऑफ फॉरेन ऐसेट्स कंट्रोल के निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश के तहत, अलास्का में बैठक के लिए कई प्रतिबंधित रूसी अधिकारियों को पहले से ही अमेरिका में प्रवेश की मंजूरी दी गई है.
पुतिन की मांग और यूक्रेन रुख
खबरों के अनुसार, पुतिन ने युद्धविराम समझौते के तहत यूक्रेन से डोनेट्स्क क्षेत्र के शेष 30% हिस्से से पीछे हटने की मांग रखी है. इस पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि, यह प्रस्ताव किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है. यूक्रेन का कहना है कि यह शर्त उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला है.
मीटिंग में यूक्रेन की गैरमौजूदगी
व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा था कि ट्रंप और पुतिन की मुलाकात राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अभ्यास का एक अच्छा मौका होगा. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध में शामिल केवल एक ही पक्ष मीटिंग में मौजूद रहेगा, और यह राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा कि वे जाएं और स्थिति को और गहराई से समझकर यह तय करें कि इस युद्ध को कैसे समाप्त किया जा सकता है. इससे संकेत मिलता है कि यूक्रेन की गैरमौजूदगी में युद्धविराम की संभावनाएं कम हैं.


