रोटी के बदले कश्मीरी महिलाओं की बदन का सौदा! पाकिस्तानी मौलवी ने PoK में मुजाहिदीनों का काला चेहरा बेनकाब किया
पाकिस्तानी मौलवी मुफ्ती सईद खान ने चौंकाने वाला दावा किया है कि कश्मीर में उग्रवादी शरणार्थी महिलाओं को भोजन के बदले यौन शोषण करने के लिए मजबूर कर रहे हैं.

कश्मीर मुद्दे पर एक चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे विवाद को नई दिशा दे दी है. पाकिस्तान के देवबंदी मौलवी मुफ्ती सईद खान ने एक सार्वजनिक भाषण में कश्मीर में सक्रिय कुछ उग्रवादी समूहों पर महिलाओं का शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को ‘मुझाहिदीन’ कहकर ग्लोरिफाई किया जाता है, वे दरअसल कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं का फायदा उठा रहे हैं.मुफ्ती सईद खान के इस बयान ने मानवीय और सामाजिक मुद्दों पर गहरी बहस छेड़ दी है. उनका दावा है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा है, जो लंबे समय से छिपाया जा रहा था.
Mufti Saeed Khan (Pakistani Islamic Scholar) narrates that at the height of Kashmir conflict, the so called “Mujahideen” would get “khoobsurat (beautiful)” young (muslim) women from refugee camps in exchange for a roti (bread). Link to this video in the comments. https://t.co/Mua8CayhC8 pic.twitter.com/gDKwAniQtp
— Omar Abbas Hyat | ഒമർ അബ്ബാസ് (@OmarAbbasHyat) March 29, 2026
भाषण में किया बड़ा खुलासा
मुफ्ती सईद खान ने कश्मीर और हमारी पाखंडता शीर्षक से दिए गए अपने व्याख्यान में इन गंभीर आरोपों का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि यह सच्चाई लंबे समय से छुपाई जाती रही है और अब सामने आ रही है.
शरणार्थी महिलाओं की त्रासदी
खान ने विशेष रूप से उन महिलाओं और लड़कियों का जिक्र किया जो शरणार्थी शिविरों में बेहद खराब हालात में जी रही हैं. उन्होंने कहा कि जहां भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं, वहां कुछ उग्रवादी उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ‘एक रोटी’ के बदले यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं.
‘मुझाहिदीन’ की छवि पर सवाल
अपने बयान में खान ने यह भी कहा कि जिन लोगों को धार्मिक योद्धा या मुझाहिदीन कहकर सम्मानित किया जाता है, उनके इस तरह के कृत्य उस छवि को गंभीर रूप से धूमिल करते हैं. उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही है, जो प्रचारित छवि से बिल्कुल अलग है.
सूत्रों की पुष्टि और पुरानी रिपोर्ट्स
सूत्रों के अनुसार मुफ्ती सईद खान के आरोप उन दस्तावेजों और रिपोर्ट्स से मेल खाते हैं, जिनमें पहले भी ऐसे आरोप लगाए गए थे. कुछ संगठित और बाहरी समर्थन प्राप्त समूह स्थानीय आबादी पर ही अत्याचार करते रहे हैं और उनकी स्थिति का फायदा उठाते हैं. इस खुलासे ने मानवाधिकार संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों को नई मजबूती दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल महिलाओं के साथ गंभीर अन्याय है, बल्कि पूरे क्षेत्र की छवि और सामाजिक ढांचे पर भी गहरा असर डालता है.


