तेल का मालिक कोई नहीं लेकिन खेल अमेरिका का, दुनिया के बाजार पर पकड़ और देशों की सांसें उसी पर टिकीं
दुनिया में तेल किसके हाथ में है, यह सवाल फिर चर्चा में है। सच यह है कि अमेरिका मालिक नहीं, लेकिन असर इतना है कि पूरा बाजार उसी के हिसाब से चलता है।

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका तेल पर कब्जा करता है। जवाब थोड़ा अलग है। अमेरिका सीधे कब्जा नहीं करता। क्योंकि हर देश का तेल उसका अपना होता है। लेकिन असर इतना मजबूत है कि फैसले प्रभावित होते हैं। रणनीति, दबाव और ताकत से अमेरिका अपना प्रभाव बनाता है। इसी वजह से यह मुद्दा चर्चा में रहता है।
क्या कानूनी तौर पर मालिक
कानूनी तौर पर अमेरिका किसी देश के तेल का मालिक नहीं है। हर देश के संसाधन उसी के होते हैं। लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं होता। आर्थिक ताकत और सैन्य मौजूदगी से असर बनाया जाता है। कई जगह फैसले अमेरिकी हित के हिसाब से होते हैं। यही असली कंट्रोल माना जाता है।
क्या सेना से बनता असर
कुछ जगहों पर अमेरिका की सैन्य मौजूदगी भी है। लेकिन ऐसे उदाहरण बहुत ज्यादा नहीं हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि असली ताकत अप्रत्यक्ष असर में है। करीब 20 से 25 बड़े तेल उत्पादक देशों में यह असर दिखता है। सीरिया इसका सबसे साफ उदाहरण है। जहां अमेरिकी सेना मौजूद है।
क्या सीरिया में सीधा कंट्रोल
सीरिया का देर-ए-ज़ोर इलाका तेल से भरपूर है। यह इराक सीमा के पास है। यहां अमेरिकी सेना तैनात है। अमेरिका इसे सुरक्षा बताता है। लेकिन सीरिया इसे कब्जा मानता है। इस इलाके में तेल उत्पादन पर सीधा असर दिखता है। यही वजह है कि यह क्षेत्र हमेशा चर्चा में रहता है।
क्या इराक में पुराना प्रभाव
इराक में 2003 के युद्ध के बाद हालात बदले। अमेरिका का असर लंबे समय तक बना रहा। तेल नीति और ढांचे पर उसका प्रभाव दिखा। आज इराक खुद मालिक है। लेकिन कई कंपनियां अब भी अमेरिकी हैं। शुरुआती फैसलों में अमेरिका की भूमिका अहम रही।
क्या खाड़ी देशों पर दबाव
सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देश अहम हैं। इन देशों के साथ अमेरिका के समझौते हैं। तेल का व्यापार डॉलर में होता है। बदले में सुरक्षा दी जाती है। इससे उत्पादन नीति पर असर पड़ता है। फैसले अक्सर अमेरिकी हित के अनुसार होते हैं।
क्या बाजार का असली खिलाड़ी
अमेरिका खुद को मालिक नहीं कहता। लेकिन बाजार का सबसे बड़ा मैनेजर जरूर है। बड़ी कंपनियां दुनिया भर में काम करती हैं। कजाकिस्तान, नाइजीरिया जैसे देशों में निवेश है। पेट्रोडॉलर सिस्टम अभी भी मजबूत है। धीरे-धीरे बदलाव जरूर आ रहा है। लेकिन फिलहाल तेल की दुनिया में सबसे बड़ा असर अमेरिका का ही है।


