'कोई खेल नहीं खेल रहा' ट्रंप का दावा, US डेलिगेशन पाकिस्तान रवाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है और ईरान से बातचीत जरूरी है. हालांकि, ईरान की भागीदारी को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पाकिस्तान में प्रस्तावित अहम वार्ताओं से पहले अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि बातचीत में प्रगति होती है तो वह ईरान के वरिष्ठ नेताओं से सीधे मुलाकात करने को तैयार हैं.

न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात में बातचीत जरूरी है और इसमें किसी तरह की चालबाजी नहीं हो रही है.

प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने का दावा

ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी टीम, जिसमें जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं, इस्लामाबाद के लिए निकल चुकी है. उन्होंने कहा, "वे अभी रवाना हो रहे हैं. वे आज रात (इस्लामाबाद) समय के अनुसार वहाँ पहुँच जाएँगे."

हालांकि, ट्रंप के इस दावे पर सवाल भी उठे हैं. रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वैंस अभी अमेरिका में ही हैं और पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए हैं.

ईरान ने जताई असहमति

जहां अमेरिका वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान ने अभी तक इसमें शामिल होने की पुष्टि नहीं की है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान इस प्रक्रिया से पीछे हटता नजर आ रहा है.

सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने कहा, "ईरान-अमेरिका वार्ता के अगले दौर में भाग लेने की फिलहाल कोई योजना नहीं है." वहीं आईआरएनए ने इसके पीछे अमेरिका की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है.

'अवास्तविक मांगें' और नाकेबंदी पर नाराजगी

आईआरएनए के मुताबिक, वार्ता से दूरी बनाने का कारण "वाशिंगटन की अत्यधिक मांगों, अवास्तविक अपेक्षाओं, रुख में लगातार बदलाव, बार-बार विरोधाभासों और जारी नौसैनिक नाकाबंदी" है. इन कारणों ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है.

पेजेश्कियन का कड़ा संदेश

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भी अमेरिका के रवैये की आलोचना की. उन्होंने लिखा, "प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना सार्थक संवाद का आधार है. अमेरिकी सरकार के आचरण के प्रति ईरान में गहरा ऐतिहासिक अविश्वास बना हुआ है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के निरर्थक और विरोधाभासी संकेत एक कड़वा संदेश देते हैं; वे ईरान को आत्मसमर्पण कराना चाहते हैं. ईरानी बल के आगे नहीं झुकेंगे."

ट्रंप बोले 'कोई खेल नहीं खेल रहा'

वार्ता को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमें वार्ता करनी है. इसलिए मुझे लगता है कि इस समय कोई भी चालाकी नहीं कर रहा है."

पहला दौर रहा बेनतीजा

इससे पहले इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहली सीधी वार्ता 21 घंटे से अधिक चली, लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वैंस ने कहा, "बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं, और मुझे लगता है कि यह अमेरिका के लिए बुरी खबर से कहीं ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है."

ट्रंप ने सीधे संवाद का रास्ता खोला

ट्रंप ने ईरानी नेताओं से सीधे मिलने की संभावना भी जताई. उन्होंने कहा, "मुझे उनसे मिलने में कोई दिक्कत नहीं है. अगर वे मिलना चाहें, और हमारे पास कुछ बहुत ही सक्षम लोग हैं - तो मुझे उनसे मिलने में कोई परेशानी नहीं है."

परमाणु मुद्दे पर सख्त रुख

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा, "उनके परमाणु हथियारों को नष्ट करो. यह बहुत आसान है. फिर कोई परमाणु हथियार नहीं बचेगा."

उन्होंने आगे कहा, "अन्यथा, यह एक शानदार देश है - वास्तव में हो सकता है."

'सत्ता परिवर्तन' का भी जिक्र

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान में "सत्ता परिवर्तन" की बात भी कही. उन्होंने दावा किया कि नेतृत्व में बदलाव देश के लिए "महान और समृद्ध भविष्य" का रास्ता खोल सकता है.

युद्धविराम की समय सीमा नजदीक

यह सारी गतिविधियां दो सप्ताह के युद्धविराम की समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले हो रही हैं, जो 22 अप्रैल को खत्म हो रही है. हालांकि ट्रंप ने संभावित परिणामों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने संकेत दिए कि हालात गंभीर हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं इस बारे में आपसे बात नहीं करना चाहता. आप कल्पना कर सकते हैं. यह अच्छा नहीं होगा."

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