370 सुसाइड ड्रोन से यूक्रेन का बड़ा हमला, मॉस्को का आसमान हुआ धुआं-धुआं, जवाब में पुतिन ने किया मिसाइल अटैक

यूक्रेन ने रूस के अंदर गहराई तक हमला करते हुए बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, जिससे घंटों तक आसमान काले धुएं से ढका रहा. इसके तुरंत बाद रूस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इस बार यूक्रेन ने रूस के अंदर गहराई तक हमला करते हुए बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे, जिससे मॉस्को के आसपास के कई इलाकों में आग लग गई और घंटों तक आसमान काले धुएं से ढका रहा. इसके तुरंत बाद रूस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए. दोनों देशों की इस जवाबी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि युद्ध अब सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा.

रूसी अधिकारियों के अनुसार, मॉस्को से करीब 50 किलोमीटर पूर्व स्थित इलेक्ट्रोस्टाल और नोगिंस्क इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमले हुए. इलेक्ट्रोस्टाल में एक बड़े लॉजिस्टिक्स कॉम्प्लेक्स में आग लग गई, जबकि नोगिंस्क स्थित तेल डिपो भी हमले की चपेट में आ गया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी भीषण थी कि उसका धुआं कई घंटों तक आसमान में दिखाई देता रहा. घटना के बाद दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया.

370 से अधिक ड्रोन भेजने का दावा

मॉस्को के मेयर ने बताया कि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों की ओर 370 से ज्यादा ड्रोन भेजे गए. रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ ड्रोन अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे. अधिकारियों का कहना है कि हमले से कुछ महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचा है. हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े मानवीय नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. क्षेत्रीय प्रशासन ने यह भी कहा कि ईंधन आपूर्ति पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन हालात नियंत्रण में हैं.

रूस ने मिसाइलों से किया जवाबी हमला

ड्रोन हमलों के कुछ ही समय बाद रूस ने यूक्रेन पर बड़े स्तर पर मिसाइल हमले किए. यूक्रेन के विदेश मंत्री के अनुसार, यह युद्ध शुरू होने के बाद रूस की सबसे बड़ी बैलिस्टिक मिसाइल कार्रवाइयों में से एक थी. यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि रातभर में रूस ने 41 मिसाइलें दागीं. इनमें से 18 मिसाइलों को यूक्रेनी एयर डिफेंस ने रास्ते में ही मार गिराया, जबकि बाकी मिसाइलों से कई इलाकों में नुकसान की खबरें सामने आई हैं.

जेलेंस्की ने बताई हमले की वजह

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि जिन स्थानों को निशाना बनाया गया, वे रूस की सैन्य गतिविधियों और ड्रोन निर्माण से जुड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा थे. उनके अनुसार, रूस लगातार यूक्रेनी शहरों पर हमले कर रहा है, इसलिए जवाबी कार्रवाई में उन ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है जो युद्ध संचालन में मदद कर रहे हैं. हालांकि रूस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यूक्रेन नागरिक क्षेत्रों पर हमला कर रहा है और इसे आतंकवादी कार्रवाई बताया.

एयर डिफेंस पर उठे सवाल

मॉस्को को दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में गिना जाता है, जहां एस-400 सहित कई आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात हैं. इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ आने के कारण कुछ ड्रोन सुरक्षा घेरा पार करने में सफल रहे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में एक साथ ड्रोन भेजना किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन सकता है. यही वजह है कि इस घटना के बाद रूस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.

तेल डिपो और सप्लाई नेटवर्क पर असर

नोगिंस्क का तेल डिपो मॉस्को क्षेत्र के लिए ईंधन आपूर्ति का अहम केंद्र माना जाता है. यहां से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की सप्लाई आसपास के इलाकों में होती है. यदि इस केंद्र को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो स्थानीय स्तर पर ईंधन वितरण प्रभावित हो सकता है. वहीं, इलेक्ट्रोस्टाल स्थित लॉजिस्टिक्स कॉम्प्लेक्स रूस के प्रमुख ई-कॉमर्स नेटवर्क का हिस्सा बताया जाता है. इस पर हुए हमले से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

युद्ध लगातार हो रहा है व्यापक

करीब तीन साल से जारी इस संघर्ष में अब दोनों देश एक-दूसरे के अंदरूनी इलाकों तक हमले करने लगे हैं. पहले जहां लड़ाई मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित थी, वहीं अब लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइलों के इस्तेमाल ने युद्ध का दायरा काफी बढ़ा दिया है. यूक्रेन लगातार अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ा रहा है, जबकि रूस मिसाइल और हवाई हमलों के जरिए जवाब दे रहा है. इससे दोनों देशों के नागरिकों, बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है.

बढ़ रही वैश्विक चिंता

मॉस्को के आसपास हुए हमलों के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल रहा. धुएं के कारण कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी. अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है. हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में इस तरह के हमलों की संख्या और गंभीरता दोनों बढ़ सकती हैं.

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