क्या ईरान पर होने वाला है बड़ा हमला? अमेरिकी एयरफोर्स की गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. सैन्य गतिविधियों, ट्रंप के सख्त बयानों और ईरान की चेतावनियों के बीच मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों ने दुनिया भर की नजरें ईरान पर टिका दी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका बड़े स्तर पर सैन्य तैयारी कर रहा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है. खास बात यह है कि जिस तरह की गतिविधियां इस समय देखी जा रही हैं, वैसी ही हलचल फरवरी में संभावित हमले से पहले भी सामने आई थी.

जानकारी के अनुसार, अमेरिकी एयरफोर्स के कई C-17A सैन्य विमान मध्य एशिया से यूरोप की ओर रवाना हुए हैं. इन विमानों का इस्तेमाल आमतौर पर भारी सैन्य उपकरण और सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है. सैन्य हलकों में इसे बड़ी तैयारी का संकेत माना जा रहा है.

अमेरिका और इजरायल की बढ़ी सैन्य तैयारी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल एक बार फिर संयुक्त सैन्य रणनीति पर काम कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों देशों के रक्षा तंत्र के बीच लगातार बातचीत हो रही है और हालात के अनुसार कार्रवाई की कई योजनाएं तैयार रखी गई हैं. 

अमेरिका के रक्षा मंत्री ने भी संकेत दिए हैं कि पेंटागन के पास कई विकल्प मौजूद हैं. इनमें जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करना, सैनिकों की संख्या बढ़ाना या परिस्थिति सामान्य होने पर उन्हें वापस बुलाना भी शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस बार सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ईरान के रणनीतिक ढांचे पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

परमाणु और सैन्य ठिकाने बन सकते हैं निशाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर हमला होता है तो इस बार ईरान के सैन्य अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. इसके अलावा उन स्थानों पर भी नजर है जहां यूरेनियम भंडार होने की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि पिछले संघर्ष के दौरान ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा था, लेकिन जमीन के नीचे मौजूद यूरेनियम भंडार पूरी तरह खत्म नहीं हो सके थे. यही वजह है कि अमेरिका अब उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर सकता है.

ट्रंप ने फिर दी कड़ी चेतावनी

चीन दौरे के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप का रुख ईरान को लेकर सख्त बना हुआ है. बीजिंग से रवाना होने से पहले ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और हालात कभी भी बदल सकते हैं. ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है.

ईरान ने कहा- हर कार्रवाई का जवाब मिलेगा

अमेरिका की संभावित सैन्य तैयारी के बीच ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका कोई कदम उठाता है तो उसका जवाब जरूर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि गलत फैसलों का असर भी गंभीर होता है और ईरान किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है. ईरान के इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है.

पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थता की कोशिश

इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री ईरान पहुंचे हैं, जहां उनकी कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात होने की संभावना है. जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है. पहले भी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी, लेकिन उससे कोई बड़ा समाधान नहीं निकल सका. दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं, जिसके चलते अगले दौर की बातचीत भी आगे नहीं बढ़ पाई.

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