PM मोदी की नीदरलैंड यात्रा से भारत को क्या मिला? विदेश मंत्रालय ने गिनाई 17 बड़ी उपलब्धियां

भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के समापन के बाद बड़ा फैसला लिया गया.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के समापन पर दोनों देशों ने अपने आपसी रिश्तों को 'रणनीतिक साझेदारी' में बदलने का बड़ा फैसला लिया. इस दौरे के दौरान पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें रक्षा, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

चोल काल के तांबे के बर्तनों की होगी घर वापसी

प्रधानमंत्री के इस दौरे का सबसे बड़ा रिजल्ट चोल राजवंश के ऐतिहासिक ताम्बे के बर्तनो से है. इन बर्तनो और कलाकृतियों की घर वापसी हुई है. नीदरलैंड, भारत के इन प्राचीन चीजों को लौटाएगा. इसके लिए 'लियोन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी' और ASI के बीच चोल इतिहास पर शोध और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर समझौता हुआ है.

'रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2026-2030' की शुरुआत

दोनों दोनों देशों के बीच इस वार्ता के बाद 'रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2026-2030' को जारी किया हुआ. यह रोडमैप आने वाले सालों में व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों को एक-दूसरे के बेहद करीब ले आएगा. इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. दोनों देशो ने साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप' को तैयार किया है और एनर्जी पर एक जॉइंट ग्रुप का करने जा रहे है. इस जॉइंट ग्रुप के बनने के बाद यूरोप के बाजारों में भारत के लिए क्लीन एनर्जी के रस्ते खुल जाएंगे.

शिक्षा, कृषि और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा

भारतीय युवाओं, छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए भी यह दौरा बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है. नीदरलैंड में इंटर्नशिप, उच्च शिक्षा और लॉन्ग-टर्म वर्क वीजा के नियमों को आसान बनाने के लिए 'गतिशीलता और प्रवासन सहयोग' पर सहमति बनी है. कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए बेंगलुरु में एक 'इंडो-डच डेयरी प्रशिक्षण केंद्र' और पश्चिम त्रिपुरा में फूलों की आधुनिक खेती के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा, जिससे भारतीय किसानों की आय और उत्पादकता दोनों में इजाफा होगा. वहीं, शिक्षा के स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करते हुए प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय और नीदरलैंड के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक सहयोग को भी हरी झंडी दे दी गई है.

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