तेल सप्लाई पर फिर मंडराया खतरा! युद्धविराम के बीच अमेरिका ने किए ईरानी ठिकानों पर हमले
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव अचानक बढ़ गया. सैन्य कार्रवाई, ट्रंप की सख्त चेतावनी और तेहरान की प्रतिक्रिया ने पूरे पश्चिम एशिया में नई चिंता पैदा कर दी है.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. 7 अप्रैल को लागू हुए नाजुक संघर्ष विराम के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इतनी तीखी सैन्य झड़प देखने को मिली. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुई गोलीबारी और सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे समय बिगड़े जब तेहरान युद्ध को खत्म करने के लिए दिए गए एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा था. इस टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर भी पड़ सकता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को दावा किया कि उसकी सेना ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की. अमेरिका के मुताबिक इन ठिकानों का इस्तेमाल उन हमलों के लिए किया जा रहा था जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले युद्धपोतों को निशाना बना सकते थे. अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह रक्षात्मक थी और अमेरिका किसी बड़े संघर्ष को बढ़ावा नहीं देना चाहता. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला ईरान की ओर से की गई सैन्य गतिविधियों के जवाब में किया गया.
ईरान ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में उसके क्षेत्र के भीतर मौजूद नागरिकों को निशाना बनाया गया. ईरानी सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि हमले के दौरान होर्मुज में प्रवेश कर रहे दो जहाज भी प्रभावित हुए. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार हालात बिगड़ने के बाद तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए थे. इससे यह संकेत मिला कि ईरान संभावित बड़े हमले को लेकर सतर्क हो गया था. इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सैन्य संकट की आशंका को और बढ़ा दिया.
ट्रंप की चेतावनी और बयान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान ने उकसावे वाली कार्रवाई जारी रखी, तो अमेरिका उससे भी ज्यादा कड़ा जवाब देगा.
ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान जल्द समझौते के लिए आगे नहीं आया, तो हम उसे बहुत कठोर और हिंसक तरीके से जवाब देंगे.' हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि संघर्ष विराम अभी भी प्रभावी है. दिलचस्प बात यह रही कि बाद में एबीसी न्यूज के एक रिपोर्टर से बातचीत में ट्रंप ने इस पूरे टकराव को 'हल्की-फुल्की कहा-सुनी' बताकर कम करके दिखाने की कोशिश की.
कूटनीतिक कोशिशों पर टिकी नजर
हालांकि गोलीबारी और तनाव के बावजूद दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि वे व्यापक युद्ध नहीं चाहते. ईरानी अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि हालात सामान्य हो चुके हैं, जबकि अमेरिका ने भी कहा कि उसका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की ओर से एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें तीन चरणों की प्रक्रिया सुझाई गई है.
इसमें औपचारिक युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने के उपाय और 30 दिनों तक बातचीत जारी रखने का प्लान शामिल है. लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि इसमें अमेरिका की उन प्रमुख मांगों का स्पष्ट जिक्र नहीं है, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन की गारंटी शामिल है.
दुनिया की नजर होर्मुज पर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है. पहले यहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई गुजरती थी. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है. तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी देशों के सहयोगियों और वैश्विक बाजारों में भी बेचैनी देखी जा रही है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक व्यापार तक दिखाई दे सकता है. फिलहाल ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसने अभी तक प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत के जरिए हालात संभलेंगे या पश्चिम एशिया एक नए बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा.


