बंकर बस्टर, बॉम्बर्स और बैटलशिप... ईरान के खिलाफ अमेरिका का प्लान तैयार!
Iran-Israel conflict: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा दी है. अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में फाइटर जेट्स, युद्धपोतों और बमवर्षकों की तैनाती कर दी है ताकि इजरायल को ईरानी हमलों से बचाया जा सके और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा की जा सके.

Iran-Israel conflict: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को बड़ा विस्तार दिया है. इस कदम का मकसद न केवल इजरायल को ईरानी हमलों से बचाना है, बल्कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इन सैन्य गतिविधियों की पुष्टि करते हुए कहा कि "हमारे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है." पेंटागन ने फाइटर जेट्स, रीफ्यूलिंग टैंकर्स और युद्धपोतों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया है, जिससे अमेरिका की सक्रियता और संभावित कार्रवाई के संकेत मिलते हैं.
अमेरिका के पास ईरानी आकाश पर पूरा नियंत्रण
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हम अब ईरान के आकाश पर पूरा नियंत्रण रखते हैं," जिससे अमेरिकी हवाई हमलों की अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मंगलवार तक किसी भी अमेरिकी विमान ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है और सभी सैन्य ऑपरेशन अब तक पूरी तरह से रक्षात्मक हैं.
मध्य पूर्व में अमेरिकी फाइटर जेट्स की तैनाती
हालांकि पूरी संख्या गोपनीय रखी गई है, लेकिन जानकारी के अनुसार, करीब दर्जनभर एफ-16 फाइटर जेट्स को सऊदी अरब भेजा गया है. अमेरिका के लड़ाकू विमान पूरे क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं. डिएगो गार्सिया में बी-52 बमवर्षक तैयार रखे गए हैं. हालांकि बी-2 स्टील्थ बमवर्षक जो 30,000 पाउंड वजन वाले बंकर बस्टर बम ले जा सकते हैं वर्तमान में तैनात नहीं हैं, लेकिन ये अमेरिका के पास एक शक्तिशाली विकल्प बने हुए हैं.
ईरान की फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर बंकर बस्टर की नजर
ईरान के पहाड़ों के भीतर स्थित फोर्डो परमाणु साइट को केवल मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर (GBU-57) जैसे शक्तिशाली बम से ही निशाना बनाया जा सकता है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, "ऐसी स्ट्राइक के लिए केवल अमेरिका के पास ही जरूरी विमान और हथियार हैं."
यूरोप से भी हो रही है रणनीतिक तैनाती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,ऑरोरा इंटेल, जो मध्य पूर्व में ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस की निगरानी करती है, ने बताया कि अमेरिका ने इंग्लैंड, स्पेन, जर्मनी और ग्रीस सहित यूरोपीय ठिकानों पर भी रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स तैनात किए हैं. यह जानकारी सार्वजनिक एविएशन ट्रैकिंग वेबसाइट्स के जरिए प्राप्त हुई है.
युद्धपोतों की भूमिका
अमेरिकी युद्धपोत ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. यूएसएस द सुलिवंस और यूएसएस आर्लेह बर्क जैसे डिस्ट्रॉयर इजरायल की रक्षा में लगे हैं. यूएसएस कार्ल विंसन और उसका स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर में तैनात है, जबकि यूएसएस निमित्ज उसकी जगह लेने या समर्थन के लिए आगे बढ़ रहा है.
यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड अगले हफ्ते यूरोपीय कमान क्षेत्र में तैनात किया जाएगा. हालांकि यह तैनाती पहले से तय थी, लेकिन मौजूदा हालात में यह ट्रंप की रणनीतिक शक्ति को और बढ़ाएगी.
अमेरिकी सैनिक जमीन पर भी सतर्क
अमेरिका ने हाल के दिनों में अपने जमीनी बलों की संख्या भी बढ़ा दी है. एक तीसरा नेवी डिस्ट्रॉयर पूर्वी भूमध्य सागर में प्रवेश कर चुका है और एक अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप अरब सागर की ओर बढ़ रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम केवल एक रक्षात्मक उपाय है, लेकिन इससे अमेरिका को इजरायल के किसी भी संभावित हमले में शामिल होने की क्षमता भी मिलती है.
40,000 तक पहुंची अमेरिकी सैनिकों की संख्या
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की संख्या अब लगभग 40,000 हो गई है, जो सामान्यतः 30,000 हुआ करती थी. कुछ सैन्य ठिकानों पर परिवारों को स्वेच्छा से निकालने की अनुमति दी गई है और सैन्य प्रतिष्ठानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. पिछले साल अक्टूबर में यह संख्या 43,000 तक पहुंच गई थी, जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तेज हुए थे.


