अमेरिका से बातचीत को तैयार नहीं ईरान, पाकिस्तान में प्रस्तावित बैठक ठुकराई; अमेरिकी मांगों को बताया 'अस्वीकार्य'
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता से साफ इनकार करते हुए अमेरिकी मांगों को 'अस्वीकार्य' बताया है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों पर अनिश्चितता गहरा गई है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है. तेहरान ने साफ तौर पर पाकिस्तान में प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे शांति प्रयासों पर अनिश्चितता गहरा गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय देशों और खासतौर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाएं फिलहाल ठप पड़ गई हैं. ईरान ने अमेरिकी मांगों को 'अस्वीकार्य' बताते हुए वार्ता से दूरी बना ली है.
वार्ता प्रयासों में आया गतिरोध
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के लिए क्षेत्रीय देशों द्वारा किए जा रहे प्रयास अब ठहराव की स्थिति में पहुंच गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि,"अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के लिए पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों के नेतृत्व में किए जा रहे मौजूदा मध्यस्थता प्रयास गतिरोध पर पहुंच गए हैं,"
जो कूटनीतिक कोशिशों की बड़ी विफलता को दर्शाता है.
पाकिस्तान में बैठक से ईरान का इनकार
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात नहीं करेगा."ईरान ने मध्यस्थों को आधिकारिक तौर पर बता दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और अमेरिकी मांगें अस्वीकार्य हैं."
इस रुख ने पाकिस्तान की ओर से प्रस्तावित वार्ता की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है.
मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका
क्षेत्रीय मध्यस्थ लगातार दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है. इस्लामाबाद ने पहले ही कहा था कि वह वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि देश "सार्थक वार्ता की मेजबानी और सुविधा प्रदान करने के लिए सम्मानित महसूस करेगा."
हालांकि, मौजूदा हालात में यह प्रस्ताव अब अनिश्चित नजर आ रहा है.
अमेरिका का रुख और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया था कि वाशिंगटन ईरान के साथ बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा था,"हम उस बातचीत में बहुत अच्छा कर रहे हैं," लेकिन उन्होंने इस पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की.
ईरान का कड़ा रुख और आरोप
ईरान ने पहले ही इन दावों को खारिज कर दिया था कि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही वार्ता का हिस्सा है. तेहरान ने स्पष्ट किया कि इन प्रयासों में उसकी कोई भागीदारी नहीं है.
मुंबई स्थित वाणिज्य दूतावास के जरिए साझा बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है और केवल "अत्यधिक और अनुचित मांगें"
मध्यस्थों के माध्यम से प्राप्त हुई हैं.
उन्होंने यह भी कहा,"पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं; हमने उनमें भाग नहीं लिया,"
साथ ही यह जोड़ा कि शांति की अपीलों का स्वागत है, लेकिन
"यह याद रखना चाहिए कि इसे किसने शुरू किया था."
15 सूत्रीय प्रस्ताव पर भी असहमति
बगाई ने यह भी खुलासा किया कि ईरान को ट्रम्प प्रशासन की ओर से 15 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने "अत्यधिक, अवास्तविक और तर्कहीन" बताते हुए खारिज कर दिया.
बढ़ी अनिश्चितता, वार्ता पर सवाल
ईरान के इस रुख के बाद पाकिस्तान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े हो गए हैं. मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि निकट भविष्य में कोई प्रत्यक्ष बातचीत संभव नहीं दिख रही है और शांति प्रक्रिया फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है.


