US ने पाकिस्तान का टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और फेंक दिया, PAK रक्षा मंत्री ने दिया चौंकाने वाला बयान
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर पाकिस्तान का 'टॉयलेट पेपर' की तरह इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने नेशनल असेंबली में अफगान युद्धों में पाकिस्तान की भागीदारी को एक ऐतिहासिक भूल बताते हुए वाशिंगटन की कड़ी आलोचना की है.

नई दिल्ली : पाकिस्तान और अमेरिका के बीच पुराने रक्षा संबंधों में अब एक कड़वाहट भरी पारदर्शिता आती दिख रही है. हाल ही में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका के प्रति एक अत्यंत तीखा और चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने वाशिंगटन पर इस्लामाबाद का केवल अपने स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. ख्वाजा आसिफ का यह बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारी हलचल मचा रहा है, बल्कि यह पाकिस्तान की पिछली विदेश नीतियों की एक आत्मघाती समीक्षा भी है.
पाकिस्तान की हालत टॉयलेट पेपर जैसी
आपको बता दें कि रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में बोलते हुए वाशिंगटन के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ वैसा ही सुलूक किया जैसे कोई टॉयलेट पेपर के साथ करता है. आसिफ के अनुसार, जब अमेरिका का काम पूरी तरह से निकल गया, तो उसने पाकिस्तान को बिना किसी हिचकिचाहट के कचरे में फेंक दिया. यह बयान साफ करता है कि अब पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में अमेरिका के प्रति पुराने विश्वास का भारी संकट खड़ा हो चुका है.
आसिफ ने 2 पूर्व सैन्य तानाशाहों को जिम्मेदार ठहराया
अपने संबोधन में आसिफ ने पाकिस्तान के दो पूर्व सैन्य तानाशाहों, जनरल जियाउल हक और परवेज मुशर्रफ को इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि इन दोनों तानाशाहों ने महज सुपरपॉवर से प्रशंसा पाने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सत्ता को मान्यता दिलाने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की बलि चढ़ा दी. ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, इन जनरलों ने पाकिस्तान को एक ऐसी अंधी जंग में झोंक दिया, जिसमें शामिल होना देश के आने वाले भविष्य के लिए एक अत्यंत घातक भूल साबित हुई.
अफगान विद्रोह अमेरिका के इशारे पर लड़ा गया...
आसिफ ने 1980 के दशक के अफगान विद्रोह की एक नई और विवादित व्याख्या पेश की है. उन्होंने दावा किया कि उस वक्त जिसे 'जिहाद' कहा गया, वह वास्तव में अमेरिका के इशारे पर लड़ा गया एक सुनियोजित विद्रोह था. उनके अनुसार, रूस ने अफगानिस्तान पर कोई अवैध कब्जा नहीं किया था, बल्कि वहां की सरकार ने ही उन्हें बुलाया था. अमेरिका को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने न केवल अपना शैक्षिक पाठ्यक्रम तक बदल दिया बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास तक को फिर से लिख डाला, जिसके कड़वे परिणाम आज तक भुगतने पड़ रहे हैं.
PAK को सिर्फ अकेलापन और धोखा ही हासिल हुआ
रक्षा मंत्री ने 2001 के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय भी पाकिस्तान ने वही पुरानी गलती दोहराई थी. मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ अमेरिका का साथ दिया, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है. अमेरिका तो अपनी सुविधा के अनुसार वहां से सुरक्षित निकल गया, लेकिन उस युद्ध का सारा बोझ और अपूरणीय नुकसान पाकिस्तान को ही उठाना पड़ा. पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस, सैन्य अड्डों की सुविधा और कराची पोर्ट अमेरिका को दिया, पर बदले में उसे सिर्फ अकेलापन और धोखा ही हासिल हुआ.
भरपाई न होने वाले नुकसान का दर्द
आसिफ ने अंत में दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका की खातिर अपने बहादुर लोग और कीमती संसाधन सब कुछ कुर्बान कर दिए. युद्ध लड़ने के लिए अपनी संप्रभुता और जमीन दी, लेकिन अंत में अमेरिका उन्हें उनके हाल पर ही अकेला छोड़कर चला गया. उनके इस बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के भीतर अब अमेरिका पर भरोसा करने को लेकर गहरा संशय और आक्रोश भरा है. यह भाषण केवल एक आरोप नहीं, बल्कि दशकों की गलत विदेश नीति पर एक पश्चाताप है जो भविष्य के रिश्तों को बदल देगा.


