क्यूबा के पास अमेरिकी युद्धपोत और सैनिक तैनात, ट्रंप के संकेतों से बढ़ा तनाव
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खबर सामने आई है कि पेंटागन ने कैरेबियाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती शुरू कर दी है, जिससे क्यूबा के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं.

नई दिल्ली: अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खबर सामने आई है कि पेंटागन ने कैरेबियाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती शुरू कर दी है, जिससे क्यूबा के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं. इसके साथ ही बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने युद्धपोत, निगरानी विमान, ड्रोन और हजारों सैनिकों को रणनीतिक रूप से तैनात किया है ताकि जरूरत पड़ने पर कम समय में कार्रवाई की जा सके.
किन-किन चीजों की गई तैनाती
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली यूएसएस निमित्ज़ विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप इस मिशन का अहम हिस्सा है. इसके साथ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और क्रूजर भी तैनात किए गए हैं. वहीं इसके अलावा लगभग 2,500 मरीन सैनिकों को ले जाने वाला जहाज यूएसएस केयर्सार्ज भी क्षेत्र में भेजे जाने की तैयारी में है. इस दौरान अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ये तैनाती केवल दबाव बनाने के लिए नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प तैयार रखने के लिए भी की गई है.
हालत बिगड़ने पर होगा इस्तेमाल
पूर्व पेंटागन अधिकारी मार्क कैंसियन ने कहा कि यूएसएस निमित्ज़ की मौजूदगी मुख्य रूप से चेतावनी देने के लिए हो सकती है लेकिन हालात बिगड़ने पर इसका इस्तेमाल सैन्य अभियान में भी किया जा सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्यूबा की हवाई सुरक्षा प्रणाली और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने वाले संभावित ऑपरेशन पर भी चर्चा हुई है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. उनका कहना है कि चीन और रूस जैसे देशों के साथ क्यूबा के संबंध वाशिंगटन के लिए चिंता का विषय हैं. हालांकि उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की बात भी कही लेकिन मौजूदा क्यूबा नेतृत्व के साथ कूटनीति को लेकर संदेह जताया जा रहा है.
क्यूबा के समर्थन की अपील
दूसरी तरफ क्यूबा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज परिला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध और सैन्य दबाव से मानवीय संकट गहरा सकता है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्यूबा के समर्थन में खड़े होने की अपील की है.
बता दें, क्यूबा पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. देश में भोजन, दवाइयों और ईंधन की कमी के साथ लगातार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है. ऐसे में अमेरिकी दबाव बढ़ने से हालात और खराब होने की आशंका जताई जा रही है.
दुनिया की टिकी नजर
उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि क्यूबा के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इस मुद्दे पर विचार किया लेकिन अब शायद उन्हें ही यह फैसला लेना पड़े. ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच हाल के महीनों में बातचीत भी हुई, लेकिन उससे कोई खास नतीजा नहीं निकला.
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और क्यूबा के बीच बढ़ते इस तनाव पर टिकी है, क्योंकि किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर भी पड़ सकता है.


