बिना समझौते के खत्म होने जा रहा युद्ध? ट्रंप ने दिए ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई खत्म करने के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 2-3 हफ्तों में समाप्त हो सकता है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई तभी रुकेगी जब ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाएगी.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका की ओर से एक बड़ा संकेत मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान जल्द ही समाप्त हो सकता है. उनके इस बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि यह संघर्ष पिछले एक महीने से जारी है और इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है.
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द इस सैन्य अभियान से बाहर निकल सकता है. उन्होंने संकेत दिया कि यह प्रक्रिया दो से तीन हफ्तों के भीतर पूरी हो सकती है. यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक अमेरिका की ओर से अभियान खत्म करने को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई थी.
समझौते की शर्त नहीं
ट्रंप ने यह भी साफ किया कि इस संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी औपचारिक समझौते की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक, अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद ही पीछे हटेगा. उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक अभियान जारी रहेगा. इस तरह उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई का मकसद साफ तौर पर तय है.
राष्ट्र को संबोधित करेंगे ट्रंप
व्हाइट हाउस की ओर से यह भी जानकारी दी गई है कि राष्ट्रपति ट्रंप राष्ट्र को संबोधित करेंगे और इस पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी देंगे. माना जा रहा है कि इस संबोधन में आगे की रणनीति और फैसलों का खुलासा हो सकता है. अमेरिका पहले ही ईरान के सामने एक प्रस्ताव रख चुका है, जिसमें कुछ सख्त शर्तें शामिल हैं. इनमें परमाणु कार्यक्रम को रोकना, यूरेनियम संवर्धन बंद करना और प्रमुख समुद्री मार्गों को खोलना शामिल है. अगर ईरान इन शर्तों को नहीं मानता, तो अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई और तेज करने की चेतावनी भी दी है.
बढ़ता तनाव और वैश्विक असर
इस संघर्ष के चलते हजारों लोगों की जान जा चुकी है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है. साथ ही, ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ी है. युद्ध के कारण तेल की कीमतों और व्यापार पर भी असर पड़ा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है.
ईरान की ओर से सख्त रुख
वहीं, ईरान ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उसके विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका से कुछ संदेश जरूर मिल रहे हैं, लेकिन उन्हें बातचीत नहीं माना जा सकता. ईरान का कहना है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी दबाव में आने को तैयार नहीं है.
इसी बीच ईरान से जुड़े संगठनों ने कुछ बड़ी अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इसमें तकनीक और उद्योग से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इससे यह साफ है कि संघर्ष का असर केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों तक भी फैल सकता है.


