जंग से तबाह ईरान... ईरानियों को छोड़ना पड़ रहा देश, सस्ता राशन खरीदने के लिए सीमा पार कर रहे लोग

अमेरिका-इजरायल हमलों और बढ़ती महंगाई से परेशान ईरानी नागरिक बड़ी संख्या में इराक के कुर्द इलाके में पहुंच रहे हैं. वे वहां सस्ता राशन खरीदने, इंटरनेट इस्तेमाल करने और काम तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

Shraddha Mishra

ईरान में जारी युद्ध ने आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. लगातार हो रहे हमलों और बढ़ती महंगाई ने हालात इतने कठिन कर दिए हैं कि अब लोग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए देश की सीमा पार करने को मजबूर हैं. बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक इराक के कुर्द इलाके में पहुंच रहे हैं, जहां वे सस्ता राशन खरीदने, इंटरनेट का इस्तेमाल करने और अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.

रविवार को जब ईरान और इराक के बीच हाजी उमरान सीमा चौकी खोली गई, तो वहां का दृश्य अचानक बदल गया. कई दिनों से बंद पड़ी सीमा के खुलते ही दर्जनों ईरानी परिवार उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में पहुंच गए. इनमें से कई लोग अपने साथ खाली बैग लेकर आए थे और लौटते समय उनमें चावल, खाने का तेल, सिम कार्ड और अन्य जरूरी सामान भरकर वापस जा रहे थे. उनका कहना है कि ईरान में अब इन चीजों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि उन्हें खरीदना आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया है.

सस्ता सामान और इंटरनेट के लिए पार कर रहे सीमा

सीमा पार कर आने वाले कई लोगों ने बताया कि वे यहां सिर्फ सामान खरीदने ही नहीं, बल्कि इंटरनेट इस्तेमाल करने और अपने परिवार से संपर्क करने के लिए भी आते हैं. युद्ध के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई है. कुछ लोग रोजगार की तलाश में भी इराक पहुंच रहे हैं. उनका कहना है कि अपने देश में काम के अवसर कम होते जा रहे हैं और रोजमर्रा की चीजें बहुत महंगी हो गई हैं. इराक से सामान लेकर ईरान लौटने वाले एक ट्रक चालक ने बताया कि सीमा बंद होने से मजदूरों से लेकर व्यापारियों तक सभी प्रभावित हुए थे. सीमा खुलने से लोगों को थोड़ी राहत मिली है.

कुर्द इलाका बना सहारा

असल में ईरान और इराक के कुर्द इलाकों के बीच लंबे समय से पारिवारिक और आर्थिक संबंध रहे हैं. युद्ध से पहले भी दोनों तरफ के लोग आसानी से एक-दूसरे के यहां आते-जाते थे. लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने के बाद यह सीमा कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी. अब जब इसे दोबारा खोला गया है, तो यह इलाका ईरान के लोगों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का अहम रास्ता बन गया है. इराकी कुर्द प्रशासन का कहना है कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद ही सीमा दोबारा खोली.

बमबारी से डर में जी रहे लोग

सीमा पार करने वाले कई ईरानी नागरिकों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर अपने देश के हालात बताए. उनका कहना है कि लगातार हो रही बमबारी से लोग डर के माहौल में जी रहे हैं. कुछ लोगों ने दावा किया कि कई सैन्य ठिकाने और सरकारी इमारतें हमलों में नष्ट हो चुकी हैं. सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं. कई अधिकारी अब अपने दफ्तरों के बजाय अन्य सुरक्षित स्थानों पर काम कर रहे हैं.

एक महिला ने बताया कि वह अपने घर से सिर्फ चावल और तेल खरीदने के लिए सीमा पार करके आई थीं, क्योंकि ईरान में इन चीजों की कीमत बहुत ज्यादा हो गई है. उन्होंने कहा कि अब लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डरते हैं और हर तरफ असुरक्षा का माहौल है. खरीदारी करने के बाद वह जल्दी-जल्दी वापस लौट गईं क्योंकि उनके बच्चे घर पर उनका इंतजार कर रहे थे.

दर्दभरी कहानी लेकर आई एक बुजुर्ग महिला

सीमा पर एक बुजुर्ग महिला भी नजर आईं, जो भारी बारिश में अकेले ही इराक की ओर जा रही थीं. उन्होंने बताया कि वह अपने रिश्तेदारों की तलाश में कुर्द क्षेत्र के एक शहर जा रही हैं ताकि उनसे मदद मांग सकें. उन्होंने बताया कि उनका बेटा पहले परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था, लेकिन करीब एक साल पहले सीमा के पास गोलीबारी में उसकी मौत हो गई. अब उनके सामने तीन छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी है.

महंगाई के कारण परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है और दो महीने का घर का किराया भी बकाया है. उन्होंने कहा कि युद्ध ने हालात और भी खराब कर दिए हैं और अब हर चीज पहले से ज्यादा महंगी हो गई है. सीमा पर कुछ ईरानी मजदूर भी दिखाई दिए, जो इराक के कुर्द क्षेत्र में काम करते हैं. वे अपने परिवार से मिलकर वापस काम पर लौट रहे थे.

इन मजदूरों ने बताया कि वे एक निर्माण कंपनी में काम करते हैं और कई बार एक महीने तक वहीं रहकर काम करते हैं ताकि ज्यादा पैसे कमा सकें. उनका कहना है कि देश में बढ़ती महंगाई के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, इसलिए उन्हें अपने घर से दूर रहकर काम करना पड़ रहा है.

आम लोगों पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर

ईरान में जारी युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है. बमबारी का डर, बढ़ती महंगाई और रोजगार की कमी ने लोगों को कठिन स्थिति में डाल दिया है. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग सिर्फ अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने और परिवार को जिंदा रखने के लिए सीमा पार करने को मजबूर हैं. युद्ध की यह मार आम लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित कर रही है.

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