ईरान ने अमेरिका को दिया नया प्रस्ताव, क्या अब खत्म होगा दोनों देशों के बीच संघर्ष?
ईरान के नए प्रस्ताव का सबसे बड़ा फोकस धीरे-धीरे शत्रुता कम करने पर है। इसके तहत तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव घटाने की बात कही है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम रास्तों में से एक है।

नई दिल्ली: हफ्तों से रुके शांति प्रयासों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। PTI ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि इस योजना को "बहु-स्तरीय" रूपरेखा बताया गया है। इसका मकसद तनाव कम करना और बातचीत फिर से शुरू करना है।
ईरान की तरह से यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से शुरू हुआ मध्य पूर्व युद्ध 8 अप्रैल से रुका हुआ है। इस्लामाबाद में बातचीत का एक दौर हुआ था, लेकिन वह बेनतीजा रहा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव घटाने का ऑफर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के नए प्रस्ताव का सबसे बड़ा फोकस धीरे-धीरे शत्रुता कम करने पर है। इसके तहत तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव घटाने की बात कही है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम रास्तों में से एक है।
ईरान ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दे, तो वह इस इलाके में सुरक्षित नौवहन बहाल करने में मदद कर सकता है। खासकर उन प्रतिबंधों में राहत मांगी गई है जो ईरान के तेल निर्यात को रोकते हैं।
पहले मिले आर्थिक राहत और फिर परमाणु चर्चा
प्राप्त जानकारियों के मुताबिक ईरान चाहता है कि आर्थिक सामान्यीकरण को परमाणु कार्यक्रम से अलग रखा जाए। अधिकारियों का कहना है कि परमाणु गतिविधियों पर सख्त वादे करने से पहले व्यापार और तेल का प्रवाह बहाल होना चाहिए। तेहरान का तर्क है कि जब तक उसकी अर्थव्यवस्था पर लगी बंदिशें नहीं हटतीं, तब तक भरोसा बनाना मुश्किल है। इसलिए पहले प्रतिबंध हटें, फिर परमाणु मुद्दों पर बात आगे बढ़े।
परमाणु कार्यक्रम पर शर्तों के साथ लचीलापन
दरअसल परमाणु मुद्दे पर ईरान ने कुछ नरमी के संकेत दिए हैं। वह शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अपने अधिकार पर कायम है। लेकिन यूरेनियम संवर्धन पर सीमा लगाने और कड़ी निगरानी के लिए तैयार दिख रहा है।
हालांकि, ईरान ने साफ किया कि ये कदम तभी उठाए जाएंगे जब प्रतिबंधों में राहत की ठोस गारंटी मिले। वह एक व्यापक समझौते के तहत ही ये रियायतें देगा। इसके अलावा तेहरान चाहता है कि अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत उसके परमाणु अधिकारों को औपचारिक मान्यता मिले।
लंबे समय तक चलने वाले समझौते की मांग
गौरतलब है कि ईरान की एक बड़ी चिंता यह भी है कि कोई भी समझौता टिकाऊ हो। वह चाहता है कि अमेरिका या कोई और देश उसे एकतरफा तरीके से न तोड़ सके। सुरक्षा गारंटी भी ईरान की प्रमुख मांग है। तेहरान को डर है कि भविष्य में अमेरिका या उसके सहयोगी फिर से सैन्य कार्रवाई न कर दें।
ईरान की शर्तें मानने लायक नहीं- ट्रंप
आपको बताते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसी शर्तें मांग रहा है जिन्हें वह स्वीकार नहीं कर सकते। हालांकि ट्रंप ने माना कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है।
उन्होंने ईरान के नेतृत्व में मतभेदों की बात भी कही और सवाल उठाया कि क्या कोई अंतिम समझौता हो पाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने यह नहीं बताया कि बातचीत फेल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होगी या नहीं। लेकिन उन्होंने कहा कि बड़े हमले के बजाय वह बातचीत से हल निकलना पसंद करेंगे।


