खारग द्वीप क्यों है इतना अहम? जानें ईरान के तेल कारोबार का सबसे बड़ा केंद्र

फारस की खाड़ी में स्थित खारग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे अहम केंद्र माना जाता है. हाल ही में अमेरिकी हमले और ट्रम्प के बयान के बाद यह द्वीप एक बार फिर वैश्विक चर्चा में आ गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खारग द्वीप पर मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक को अंजाम दिया. इस हमले में फारस की खाड़ी में स्थित इस छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि वहां के तेल बुनियादी ढांचे को जानबूझकर सुरक्षित रखा गया.

ट्रम्प ने कहा कि फिलहाल तेल से जुड़ी संरचनाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है, लेकिन यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है तो इस फैसले पर पुनर्विचार किया जा सकता है. इस बयान के बाद खारग द्वीप और उसके तेल भंडार को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.

ट्रम्प का बयान

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, "शालीनता के कारणों से, मैंने द्वीप पर तेल अवसंरचना को नष्ट न करने का निर्णय लिया है,"

उन्होंने आगे लिखा, "हालांकि, अगर ईरान, या कोई और, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन में बाधा डालने का प्रयास करता है, तो मैं तुरंत इस निर्णय पर पुनर्विचार करूंगा."

यह हमला तेहरान के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि यदि ईरान जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की कोशिश करता है तो अगला निशाना तेल भंडार हो सकते हैं. ट्रम्प ने ईरानी सेना के सदस्यों से हथियार डालने और "अपने देश को बचाने" का भी आह्वान किया.

क्या है खारग द्वीप?

खारग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा प्रवाल द्वीप है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 7.7 वर्ग मील है. यह ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट से करीब 27 मील दूर और होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 300 मील की दूरी पर स्थित है.

इस द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है. ईरान के अधिकांश तटीय क्षेत्र उथले हैं, जहां बड़े कच्चे तेल के टैंकर आसानी से नहीं पहुंच सकते. लेकिन खारग द्वीप के पास गहरा पानी होने के कारण विशाल टैंकर तट के करीब आकर कच्चा तेल भर सकते हैं और तुरंत रवाना हो सकते हैं.

ईरान के मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के तेल क्षेत्रों से पाइपलाइनें सीधे इस द्वीप तक आती हैं और यहां की लोडिंग जेटियों से तेल जहाजों में भरा जाता है.

विशेषज्ञों की राय

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय में पेट्रोलियम के प्रोफेसर ह्यूग डेगल ने कहा, "ईरानी जलक्षेत्र में यह उन कुछ जगहों में से एक है जहां तेल टैंकर पहुंच सकते हैं. पानी इतना गहरा है कि वे तट के करीब जा सकते हैं. यह भौगोलिक दृष्टि से अद्वितीय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है."

खारग द्वीप का इतिहास

इस द्वीप की स्थापना मूल रूप से अमेरिकी तेल कंपनी एमोको द्वारा की गई थी. बाद में 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान ईरान ने इस पर नियंत्रण कर लिया. इसके बाद से यह देश के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्रों में से एक बन गया.

कितनी मात्रा में तेल का परिवहन होता है?

सामान्य परिस्थितियों में खारग द्वीप से प्रतिदिन लगभग 13 लाख से 16 लाख बैरल तेल का परिवहन किया जाता है. हालांकि मौजूदा संघर्ष शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले यह आंकड़ा तेजी से बढ़ गया था.

जेपी मॉर्गन और ऊर्जा फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के मध्य में ईरान ने प्रतिदिन लगभग 3 से 40 लाख बैरल तेल का परिवहन किया. ऐसा माना जा रहा है कि संभावित अमेरिकी हमले की आशंका को देखते हुए ईरान ने अपने निर्यात को अधिकतम करने की कोशिश की.

द्वीप पर कितना तेल भंडार है?

जेपी मॉर्गन के अनुसार, खारग द्वीप पर बैकअप रिजर्व के रूप में लगभग 18 मिलियन बैरल तेल का अतिरिक्त भंडार मौजूद है.

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल का परिवहन हुआ था. सामान्य तौर पर इस मार्ग से गुजरने वाले कुल तेल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा खारग द्वीप से होकर गुजरता है.

ईरान के कुल तेल निर्यात का करीब 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप के जरिए दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है.

अगर तेल संयंत्र नष्ट हो जाएं तो क्या होगा?

फिलहाल ट्रम्प ने द्वीप के तेल बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखा है, लेकिन इस पर हमले की संभावना को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. विश्लेषकों के अनुसार, यदि खारग द्वीप की तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचता है तो इसका असर सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

ईरान की आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है, इसलिए इन संयंत्रों के नष्ट होने से देश की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है.

इसके अलावा वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही लगभग बंद होने की स्थिति में है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं. ऐसे में खारग द्वीप से आपूर्ति रुकने पर वैश्विक बाजार में तेल की कमी और कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.

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