ग्रीनलैंड पर क्यों है अमेरिका की नजर ? क्या है ट्रंप की दिलचस्पी के पीछे की पूरी रणनीति

ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति, सैन्य महत्व, प्राकृतिक संसाधनों और नए समुद्री मार्गों के कारण अमेरिका के लिए अहम बन गया है. चीन और रूस की बढ़ती दिलचस्पी ने इसकी भू-राजनीतिक अहमियत और बढ़ा दी है.

Shraddha Mishra

वेनेजुएला को लेकर सैन्य कार्रवाई, राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी की चर्चाएं और सत्ता संचालन से जुड़े बयानों के बाद एक बार फिर अमेरिका की विदेश नीति सुर्खियों में है. इसी बीच ग्रीनलैंड को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. कहा जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी अब ग्रीनलैंड पर बढ़ती जा रही है. भले ही यह तुरंत होने वाला कदम न लगे, लेकिन ट्रंप की अप्रत्याशित राजनीति को देखते हुए किसी संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता.

ग्रीनलैंड का नाम सुनते ही बर्फ, ग्लेशियर और कड़ाके की ठंड की तस्वीर सामने आती है. लेकिन आज की वैश्विक राजनीति में यह इलाका सिर्फ ठंडा द्वीप नहीं रहा. यह आर्कटिक क्षेत्र का एक ऐसा अहम हिस्सा है, जो आने वाले समय में रणनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और यह उत्तर अटलांटिक महासागर और आर्कटिक क्षेत्र के बीच स्थित है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खास बनाती है.

अमेरिका की सुरक्षा रणनीति में ग्रीनलैंड

अमेरिका लंबे समय से आर्कटिक क्षेत्र को अपनी सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा मानता रहा है. यह इलाका रूस और उत्तरी अमेरिका के बीच सबसे छोटा रास्ता है. शीत युद्ध के समय से ही अमेरिका ने यहां सैन्य निगरानी और रडार सिस्टम तैनात कर रखे हैं. ग्रीनलैंड में स्थित थुले स्पेस बेस (अब पिटुफिक स्पेस बेस) मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी जैसे कामों में अहम भूमिका निभाता है. जैसे-जैसे आर्कटिक में गतिविधियां बढ़ रही हैं, इस बेस का महत्व भी बढ़ता जा रहा है.

चीन और रूस की बढ़ती दिलचस्पी

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की चिंता का एक बड़ा कारण चीन और रूस भी हैं. रूस ने आर्कटिक में अपने सैन्य ढांचे को मजबूत किया है, जबकि चीन खुद को "नियर-आर्कटिक देश" बताकर यहां रिसर्च और निवेश बढ़ा रहा है. अमेरिका को डर है कि अगर इन देशों का प्रभाव बढ़ा, तो भविष्य में समुद्री रास्तों, संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था पर उसका नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है. ग्रीनलैंड इस पूरे क्षेत्र पर नजर रखने के लिए एक अहम जगह है.

प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी भूमिका

ग्रीनलैंड के नीचे खनिज और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार होने की संभावना मानी जाती है. ये खनिज मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और नई तकनीकों में इस्तेमाल होते हैं. दुनिया में इन संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ रही है और अमेरिका चाहता है कि इन पर किसी एक देश का कब्जा न हो. ग्रीनलैंड भविष्य में अमेरिका के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन सकता है.

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही है. इससे नए समुद्री मार्ग खुलने की संभावना है, जो वैश्विक व्यापार को तेज और सस्ता बना सकते हैं. ग्रीनलैंड इन संभावित रास्तों के पास स्थित होने के कारण निगरानी, बंदरगाह और सहायता केंद्र के रूप में अहम बन सकता है.

सबसे बड़ी बाधाएं क्या हैं?

ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना आसान नहीं है. यह डेनमार्क के अधीन है और उसे काफी हद तक स्वायत्तता मिली हुई है. किसी भी तरह के बदलाव के लिए कानूनी प्रक्रिया, डेनमार्क की सहमति और स्थानीय लोगों की मंजूरी जरूरी होगी. इसके अलावा, कठोर मौसम, विशाल क्षेत्र और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यहां विकास और प्रशासन पर भारी खर्च आएगा.

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