इस साल गर्मी का कहर और बढ़ेगा! IMD का अलर्ट, हीटवेव से बचाव के लिए ये टिप्स जरूर फॉलो करें
मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है इस बार मार्च से मई तक देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से काफी अधिक गर्मी पड़ने वाली है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल हीटवेव पहले से भी ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकती है.तो तैयार रहिए, गर्मी का कहर बढ़ने वाला है.

भारत में इस साल भयंकर गर्मी पड़ने वाला है, जिसकी चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही जारी कर दी है. IMD के अनुसार, मार्च से मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है, साथ ही हीटवेव के दिनों की संख्या भी औसत से ज्यादा होने का अनुमान है. फरवरी 2026 कई क्षेत्रों में 1901 के बाद के सबसे गर्म महीनों में से एक दर्ज किया गया, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ला नीना से एल नीनो की स्थिति बनती है तो गर्मी और हीटवेव का प्रकोप और तेज हो सकता है.
यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है, जहां हीटवेव न केवल लंबी बल्कि अधिक खतरनाक हो रही हैं. आम लोगों से लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक सभी को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस बार गर्मी का कहर स्वास्थ्य, पानी की उपलब्धता और बिजली की मांग पर भारी असर डाल सकता है.
हीटवेव क्या होती है?
हीटवेव तब उत्पन्न होती है जब किसी क्षेत्र में लगातार कई दिनों तक तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहता है. यदि इसके साथ नमी का स्तर भी ऊंचा हो तो गर्मी का प्रभाव और घातक हो जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व स्तर पर हीटवेव पहले की तुलना में अधिक लंबी और खतरनाक हो रही हैं.
किन लोगों पर पड़ता है सबसे ज्यादा खतरा?
हीटवेव हर किसी को प्रभावित करती है, लेकिन कुछ समूह विशेष रूप से जोखिम में होते हैं. इनमें नवजात शिशु और छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग तथा पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोग शामिल हैं. बच्चों का शरीर गर्मी को नियंत्रित करने में वयस्कों जितना सक्षम नहीं होता, जिससे वे जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं.
हीटवेव से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय
पर्याप्त पानी पिएं : गर्मी के दिनों में पूरे दिन नियमित रूप से पानी पीना अत्यंत आवश्यक है, भले ही प्यास न लगे. बच्चों को भी बार-बार पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें.
दोपहर की तेज धूप से बचें : दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से परहेज करें. यदि जरूरी हो तो छायादार स्थानों पर रुक-रुक कर चलें.
घर को ठंडा बनाए रखें : खिड़कियों पर पर्दे या ब्लाइंड्स बंद रखें ताकि धूप अंदर न आए. रात में खिड़कियां खोलकर ठंडी हवा लें. पंखा या कूलर का उपयोग तापमान कम करने में सहायक होता है.
हल्के और ढीले कपड़े पहनें : कॉटन जैसे हल्के कपड़े चुनें, जो शरीर को ठंडक प्रदान करें और घमौरियों से बचाव करें.
बाहर जाते समय अतिरिक्त सावधानियां : सनस्क्रीन लगाएं, टोपी या छाता इस्तेमाल करें, बीच-बीच में छांव में आराम करें.
हीट स्ट्रेस के लक्षण पहचानें
हीट स्ट्रेस के प्रमुख लक्षणों में बहुत अधिक पसीना आना, चक्कर आना या कमजोरी, सिरदर्द, मतली या उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यदि बेहोशी, कंफ्यूजन, अत्यधिक शरीर का तापमान या दौरे जैसे गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें.
हीट स्ट्रेस होने पर तत्काल क्या करें?
व्यक्ति को तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं, शरीर पर ठंडे पानी या गीले कपड़े लगाएं, पानी या ORS पिलाएं. गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाएं.


