क्या सच में बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ? स्टेथोस्कोप से हुई जांच का वीडियो वायरल, जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
जौनपुर के रासमंडल मंदिर में रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ का डॉक्टरों द्वारा स्टेथोस्कोप से प्रतीकात्मक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

नई दिल्ली: जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 2026 से पहले उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में डॉक्टरों की एक टीम भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा का स्टेथोस्कोप और अन्य चिकित्सा उपकरणों से प्रतीकात्मक स्वास्थ्य परीक्षण करती दिखाई दे रही है.
पहली नजर में यह दृश्य लोगों को हैरान कर सकता है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और आस्था जुड़ी हुई है. बताया जा रहा है कि यह रस्म जौनपुर के प्रसिद्ध रासमंडल मंदिर में हर साल रथ यात्रा से पहले निभाई जाती है.
क्या है भगवान के मेडिकल टेस्ट की परंपरा?
रासमंडल मंदिर में रथ यात्रा शुरू होने से पहले भगवान जगन्नाथ के स्वास्थ्य परीक्षण की प्रतीकात्मक रस्म निभाई जाती है. इस दौरान डॉक्टर पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की प्रतिमा का स्टेथोस्कोप से परीक्षण करते हैं. इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस वर्ष भी यह परंपरा पूरी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखा और साझा किया जा रहा है.
शत प्रतिशत नंबर लाकर मैरिट में प्रथम स्थान लाने वाले मनुवादी डॉक्टरों ने प्रभु जगन्नाथ का चेकअप कर लिया है, वह पूर्णतः स्वस्थ हो चुके हैं 🔥🔥
— Ravi Parmar (@raviparmarIN) July 15, 2026
मैरिट और योग्यता का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है, टकला डॉक्टर थोड़ा परेशान दिख रहा है, कह रहा है थोड़ा सा बुखार है घबराने की कोई बात… pic.twitter.com/pVYR40o9vY
स्नान पूर्णिमा के बाद क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान?
धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. मान्यता है कि लंबे स्नान के कारण भगवान को ज्वर हो जाता है. इसी वजह से उन्हें कुछ दिनों तक विश्राम दिया जाता है और भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते.
क्या होता है अनासर काल?
स्नान पूर्णिमा के अगले दिन से आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक का समय 'अनासर काल' कहलाता है. इस अवधि में भगवान जगन्नाथ स्वास्थ्य लाभ करते हैं, इसलिए मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद रहते हैं। इस दौरान श्रद्धालु भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते.
इलाज के दौरान क्या अर्पित किया जाता है?
अनासर काल में भगवान को आयुर्वेदिक काढ़ा, जड़ी-बूटियां और हल्का भोजन अर्पित किया जाता है. इसे भगवान के उपचार का प्रतीक माना जाता है। रथ यात्रा से पहले किया जाने वाला मेडिकल टेस्ट भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जो भगवान के स्वस्थ होने का प्रतीक माना जाता है.
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ लोग इस अनोखी परंपरा को देखकर आश्चर्यचकित हुए, जबकि कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का अद्भुत उदाहरण बताया. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह रस्म कई वर्षों से निभाई जा रही है और इसे भगवान के स्वस्थ होने के साथ रथ यात्रा के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है.


