कब है जानकी जयंती? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

मिथिला के राजा जनक की पुत्री माता सीता के अवतरण दिवस को श्रद्धा और भक्ति के साथ जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द की कामना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

हिंदू सनातन परंपरा में माता सीता को आदर्श नारीत्व, त्याग, करुणा, संयम और अटूट प्रेम की मूर्ति माना गया है. भगवान श्रीराम की जीवनसंगिनी और मिथिला के राजा जनक की पुत्री माता सीता के अवतरण दिवस को श्रद्धा और भक्ति के साथ जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है. 

यह पर्व विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द की कामना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन भक्तजन माता जानकी की पूजा कर उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं. आइए जानते हैं वर्ष 2026 में जानकी जयंती की तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व.

जानकी जयंती 2026 की तिथि

पौराणिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार माता सीता का जन्म फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि का आरंभ 9 फरवरी को सुबह 5 बजकर 1 मिनट से होगा, जबकि इसका समापन 10 फरवरी को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. शास्त्रों में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया गया है. अष्टमी तिथि 9 फरवरी को पूरे दिन और रात्रि तक विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन यानी सोमवार, 9 फरवरी 2026 को जानकी जयंती मनाना धर्मसम्मत और शुभ माना जाएगा.

जानकी जयंती की पूजा विधि

इस पावन दिन माता सीता और भगवान श्रीराम की संयुक्त पूजा की जाती है. भक्तों को सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं. माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. माता सीता को लाल चुनरी अर्पित करें और श्रृंगार सामग्री जैसे बिंदी, चूड़ियां, सिंदूर आदि चढ़ाएं. पुष्प, फल और घर में बने सात्विक व्यंजनों का भोग लगाएं. अंत में राम-सीता की आरती कर सुखी वैवाहिक जीवन और पारिवारिक शांति की कामना करें. इस दिन विवाहित महिलाओं द्वारा सुहाग की वस्तुओं का दान करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है.

जानकी जयंती का धार्मिक महत्व

धार्मिक विश्वासों के अनुसार जानकी जयंती का व्रत रखने से दांपत्य जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख के लिए यह व्रत करती हैं. माता सीता की आराधना से घर में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वहीं अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है.

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