30 अप्रैल या 1 मई, कब मनाया जाएगा बुद्ध पूर्णिमा? जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है. वैशाख महीने की पूर्णिमा का हिंदू और बौद्ध, दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए बहुत अधिक महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था.

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। वैशाख महीने की पूर्णिमा का हिंदू और बौद्ध, दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए बहुत अधिक महत्व है. इस दिन को 'बुद्ध पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है. भगवान बुद्ध का जन्म सिद्धार्थ के रूप में एक राजघराने में हुआ था. राजसी जीवन त्यागकर उन्होंने सत्य की खोज के लिए कठिन तपस्या की. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था. आइए अब जानते हैं कि इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा किस दिन पड़ेगी, साथ ही पवित्र स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए शुभ मुहूर्त क्या होंगे.
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने की पूर्णिमा 30 अप्रैल, 2026 को रात 9:12 बजे शुरू होगी और 1 मई, 2026 को रात 10:52 बजे समाप्त होगी. धार्मिक व्रत और पूजा-अर्चना 'उदया तिथि' (वह तिथि जो सूर्योदय के समय प्रभावी होती है) के आधार पर की जाती है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा शुक्रवार, 1 मई, 2026 को मनाई जाएगी. प्रयास करें कि इस दिन ब्रह्म उत्सव में ही स्नान करें. बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. भगवान बुद्ध को खेड का भोग लगाया जाता है.
बुद्ध पूर्णिमा ऐसे करें पूजा
वैशाख पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा के त्योहार 1 मई को मनाए जाएंगे. वैशाख पूर्णिमा 1 मई को चंद्र दर्शन का समय शाम लगभग 6:52 बजे होने का अनुमान है; इस क्षण को अत्यंत शुभ माना जाता है. वैशाख पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर चिंतन करने का भी एक अवसर होता है. भगवान बुद्ध जिन्होंने सत्य, अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया हैं. इस दिन, बौद्ध अनुयायी अपना समय ध्यान, दान-पुण्य और सेवा कार्यों में लगाते हैं, जबकि हिंदू भक्त भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा-अर्चना करते हैं.
बुद्ध पूर्णिमा की तिथि
बुद्ध पूर्णिमा के दिन, स्नान और दान का समय सुबह 4:15 बजे से शुरू होकर सुबह 4:58 बजे तक रहेगा. वैशाख पूर्णिमा के दिन ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, और तभी से उन्हें "बुद्ध" कहा जाने लगा. इसी दिन भगवान बुद्ध को बोधि प्राप्त हुई थी, इसलिए इसे उनका 'आध्यात्मिक पुनर्जन्म' भी कहा जाता है.


