यह अब सपना नहीं, हकीकत है. हमें ‘नेशनल चैंपियंस’ कहलाने में लगभग सात दशक लग गए और आखिरकार इंतजार खत्म हो गया. परवेज रसूल ने अपने हालिया पीटीआई कॉलम में जो एक लाइन लिखी, उसने जम्मू-कश्मीर के 67 साल पुराने सपने को शब्दों में पिरो दिया. भारत की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में पहली बार जम्मू-कश्मीर ने खिताब जीत लिया. 2026 सीजन के फाइनल में कर्नाटक के खिलाफ पहले पारी की 291 रनों की निर्णायक बढ़त के दम पर टीम ने यह ऐतिहासिक जीत हासिल की.
दशकों तक रणजी ट्रॉफी में सिर्फ अच्छे हफ्ते की उम्मीद लेकर उतरने वाली जम्मू-कश्मीर इस बार पांच दिन तक मैदान पर टिकी रही और काम तमाम कर दिया. परवेज रसूल की अगुवाई वाली टीम ने न केवल खेला, बल्कि जीत का मकसद पूरा कर दिखाया.
जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 584 रन बनाकर मैच पर पकड़ मजबूत कर ली. यह स्कोर किसी एक बल्लेबाज के दम पर नहीं, बल्कि लगातार साझेदारियों से खड़ा हुआ. शुभम पुंडीर ने शुरुआत में तेज रन बनाए, परास डोगरा ने मध्यक्रम को संभाला और साहिल लोत्रा की नाबाद अर्धशतकीय पारी ने दिन-2 के अंत तक कर्नाटक को पीछे धकेल दिया.
कर्नाटक की जवाबी पारी कभी पटरी पर नहीं आई. औकिब नबी ने शुरुआती झटके दिए, केएल राहुल को जल्दी आउट किया और मध्यक्रम को तितर-बितर कर दिया. टीम 57/4 पर सिमट गई. मयंक अग्रवाल ने 160 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाज साथ नहीं दे सके. कर्नाटक 293 पर ऑलआउट हो गई और जम्मू-कश्मीर को 291 रनों की बढ़त मिल गई, जो फाइनल में निर्णायक साबित हुई.
बढ़त का फायदा उठाते हुए जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में भी संयमित बल्लेबाजी की. 11/2 के संकट से उबरते हुए कमरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने शानदार साझेदारी की. कमरान ने नाबाद 160 और लोत्रा ने 101 रन बनाए. टीम 342/4 पर पहुंची और लंच के बाद डिक्लेयर कर दिया. कर्नाटक के पास अब जीत की कोई उम्मीद नहीं बची थी. मैच ड्रॉ रहा, लेकिन 633 रनों की कुल बढ़त के साथ जम्मू-कश्मीर ने खिताब अपने नाम कर लिया. First Updated : Saturday, 28 February 2026