पति की मौत के बाद भी पत्नी को मिलेगा गुजारा भत्ता, इलाहाबाद HC ने तय की जिम्मेदारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए कहा कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती. कोर्ट ने माना कि पत्नी पर झूठी गवाही के आरोप साबित नहीं हुए और वह भरण-पोषण की हकदार है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पति द्वारा पत्नी के खिलाफ झूठी गवाही (परजरी) का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाली अपील को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने इस दौरान स्पष्ट किया कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति पर होती है और यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होता. अदालत ने कहा कि यदि पति की मृत्यु हो जाती है तो पत्नी अपने ससुर की संपत्ति से भी भरण-पोषण की मांग कर सकती है.

अकुल रस्तोगी की याचिका पर सुनवाई

यह फैसला जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने अकुल रस्तोगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया. याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी के खिलाफ कथित झूठे बयान देने पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया.

मामले की सुनवाई के दौरान पति की ओर से यह तर्क दिया गया कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण के दावे में कई तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया. आरोप था कि पत्नी ने खुद को गृहिणी बताया, जबकि वह नौकरी करती है. इसके अलावा, उसने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर भी सही जानकारी नहीं दी और बैंक खातों में जमा रकम के बारे में भ्रम पैदा किया.

हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना. अदालत ने कहा कि पत्नी के नौकरी करने का कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया. केवल आरोप लगाने से यह साबित नहीं होता कि उसने झूठ बोला है. साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी दस्तावेज के केवल एक हिस्से को स्वीकार कर बाकी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, बल्कि पूरे दस्तावेज को समग्र रूप से देखना जरूरी होता है.

 कोर्ट ने क्या कहा? 

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) के मुद्दे पर भी कोर्ट ने कहा कि यह रकम पत्नी के पिता द्वारा जमा की गई थी और शादी के बाद पिता पर उसका भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी नहीं होती. वर्तमान में पत्नी के पास सीमित धनराशि बची है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसे अपने गुजारे के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है.

अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत पति का अपनी पत्नी के भरण-पोषण का दायित्व सर्वोपरि है. यदि पति की मृत्यु हो जाती है तो यह जिम्मेदारी परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर ससुर पर आ सकती है. अंत में, कोर्ट ने कहा कि अपील में ऐसे कोई ठोस आधार नहीं हैं जिनसे यह साबित हो सके कि पत्नी ने जानबूझकर झूठे बयान दिए हैं. इसलिए अपील को खारिज किया जाना उचित है.

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