असम चुनाव से पहले विपक्ष में दरार! JMM के अकेले चुनाव लड़ने से बिगड़ा कांग्रेस का प्लान, क्या BJP को मिलेगा फायदा?

असम विधानसभा चुनाव से पहले JMM ने 21 उम्मीदवार उतारकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इस कदम से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि विपक्षी वोट बंटने से BJP को फायदा मिल सकता है.

Shraddha Mishra

देश में चुनावी माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. इसी बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के एक फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. पार्टी ने असम में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

झारखंड में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली JMM ने इस बार असम में अलग रास्ता चुना है. पार्टी ने 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए 21 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश में थे.

गठबंधन की कोशिशें रहीं नाकाम

JMM के इस फैसले से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है. पार्टी को डर है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्ष के वोट बंट सकते हैं, खासकर आदिवासी समुदाय के वोट. कांग्रेस का मानना है कि इसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है, जो पहले से ही असम में मजबूत स्थिति में है.

कांग्रेस शुरू से ही चाहती थी कि वह JMM के साथ मिलकर चुनाव लड़े. इसके लिए उसने सीटों का प्रस्ताव भी दिया था. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने JMM को करीब 57 सीटों का ऑफर दिया था, लेकिन दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई. आखिरकार JMM ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया.

क्या है JMM की रणनीति?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, JMM अब झारखंड से बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. असम में पार्टी खासतौर पर आदिवासी और चाय बागान मजदूरों के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति के तहत उसने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले पर निराशा जताई है. उनका कहना है कि विपक्षी एकता मजबूत होती तो BJP को कड़ी चुनौती दी जा सकती थी. पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने गठबंधन के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन JMM ने अलग रास्ता चुन लिया.

किन सीटों पर लड़ रही है JMM

JMM ने असम की कई महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें मज़बत, विश्वनाथ, खुमताई, चाबुआ, गोसाईगांव, रंगपारा, मार्घेरिटा, नाहरकटिया और तिताबोर जैसी सीटें शामिल हैं. इन इलाकों में आदिवासी और श्रमिक वर्ग की अच्छी खासी आबादी है, जिसे JMM अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है.

इस फैसले से असम के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. जहां एक ओर JMM अपने विस्तार की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस को अपने वोट बैंक में सेंध लगने का डर है. अगर विपक्षी वोट बंटते हैं, तो इसका फायदा सत्तारूढ़ पार्टी को मिल सकता है.

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