मुंबई में मेयर चुनाव को लेकर घमासान तेज, सामान्य आरक्षण पर शिवसेना ने किया वॉकआउट, जानें किसकी होगी ताजपोशी

मुंबई मेयर पद 'सामान्य महिला' के लिए आरक्षित होने पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया. शिवसेना ने पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी-शिंदे गठबंधन सत्ता-साझाकरण और आंतरिक कलह के बीच पद पर बहस कर रहा है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

मुंबईः मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रही राजनीतिक गहमागहमी गुरुवार को और बढ़ गई जब लॉटरी ड्रॉ में खुलासा हुआ कि यह प्रतिष्ठित पद 'सामान्य महिला' श्रेणी के लिए आरक्षित है. इस फैसले ने राजनीतिक दलों और जनता के बीच हंगामा खड़ा कर दिया. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस प्रक्रिया और परिणाम दोनों पर आपत्ति जताई है और इसे पक्षपातपूर्ण बताया है.

आरक्षण की श्रेणियां

इस वर्ष के आरक्षण के अनुसार, पुणे, धुले, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), नांदेड़, नवी मुंबई, मालेगांव, मीरा-भयंदर, नासिक और नागपुर में मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है. वहीं लातूर, जालना और ठाणे नगर निगमों को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किया गया है. इसमें लातूर और जालना अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि ठाणे सभी के लिए खुला है.

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कुल आठ नगर निगमों का आरक्षण किया गया है. इनमें अकोला, चंद्रपुर, अहिल्यानगर और जलगांव ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि पनवेल, इचलकरंजी, कोल्हापुर और उल्हासनगर ओबीसी उम्मीदवारों के लिए खुले रखे गए हैं.

शिवसेना का विरोध

मुंबई मेयर पद के आरक्षण को लेकर उद्धव सेना ने सवाल उठाया है. पूर्व मेयर और उद्धव सेना नेता किशोरी पेडनेकर ने बीएमसी को ओबीसी श्रेणी में शामिल न किए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह पद पिछले दो कार्यकालों में खुला रहा था और इस बार केवल 'सामान्य महिला' के लिए आरक्षित होना समुदाय के प्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से अनुचित है. इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक राज्य मंत्री ने कहा कि इस आपत्ति को नोट किया गया है और आवश्यक जांच की जाएगी.

लॉटरी ड्रॉ के बाद की प्रतिक्रियाएं

पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुंबई में कई ऐसे इलाके हैं जहां ओबीसी समुदाय के लोग रहते हैं. लॉटरी में उनके प्रतिनिधियों के नाम वाली कोई पर्ची नहीं डाली गई. यह गलत है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. बीएमसी के हाल ही में संपन्न चुनावों में, महायुति गठबंधन ने लगभग तीन दशक तक ठाकरे परिवार के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया. चुनाव परिणामों में भाजपा ने 89 सीटें और शिंदे सेना ने 29 सीटें जीतीं, जिससे स्पष्ट बहुमत मिला.

गठबंधन में आंतरिक कलह

हालांकि सत्ता हासिल करने के बावजूद, बीजेपी-शिंदे सेना गठबंधन मुंबई मेयर पद को लेकर आंतरिक संघर्ष का सामना कर रहा है. बीजेपी शिंदे सेना पर सत्ता-साझाकरण समझौते के लिए दबाव डाल रही है, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गठबंधन की एकता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के कड़े रुख के चलते शिंदे सेना ने अपनी तथाकथित होटल की राजनीति समाप्त कर दी और तीन दिन के प्रवास के बाद अपने पार्षदों को वापस बुला लिया.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag