दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तान में बर्फ, वैज्ञानिक और स्थानीय दोनों हैरान
सहारा रेगिस्तान और सऊदी अरब में जनवरी 2026 में असामान्य बर्फबारी हुई. उत्तरी अल्जीरिया के अइन सेफरा और ताबुक पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और नमी के मिलन से बर्फ गिरी. यह दुर्लभ घटना जलवायु अस्थिरता की ओर इशारा करती है.

नई दिल्लीः सहारा रेगिस्तान और बर्फ यह नाम सुनना ही विरोधाभासी लगता है. दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तानों में गिना जाने वाला सहारा आमतौर पर तपती धूप, शुष्क हवाओं और अंतहीन रेत के टीलों के लिए जाना जाता है. लेकिन जनवरी 2026 के मध्य में उत्तरी अल्जीरिया के कुछ हिस्सों में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी को चकित कर दिया.
अल्जीरिया के उत्तर में स्थित अइन सेफरा नामक कस्बे के आसपास सुनहरी रेत के टीलों पर सफेद बर्फ की चादर बिछी हुई दिखाई दी. स्थानीय लोगों ने इस नजारे की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.
बर्फबारी का कारण
इस दुर्लभ घटना के पीछे मुख्य कारण था उत्तरी अफ्रीका में दक्षिण की ओर बढ़ी ठंडी हवाओं की एक तेज लहर. सर्दियों में यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र से आने वाली ठंडी हवाएं कभी-कभी उत्तरी अफ्रीका तक पहुंच जाती हैं. जनवरी के मध्य में इसी ठंडी हवा की वजह से उत्तरी अल्जीरिया में तापमान शून्य या उसके नीचे चला गया.
इसी समय, अटलांटिक महासागर और भूमध्यसागर से नम हवा भीतर की ओर खिंची. जब यह नमी भरी हवा सहारा के उत्तरी किनारे पर ठंडी हवा से टकराई, तो बर्फ गिरने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन गईं.
रेगिस्तान में बर्फ क्यों गिरती है?
हालांकि सहारा अपने तपती धूप के लिए प्रसिद्ध है, सर्दियों की रातें यहां बेहद ठंडी होती हैं, विशेषकर ऊँची पहाड़ी क्षेत्रों में. बर्फ गिरने के लिए दो चीजें जरूरी हैं: पर्याप्त ठंडक और नमी. सहारा में नमी बहुत कम होती है, लेकिन पूरी तरह अनुपस्थित नहीं है.
When winter meets the desert 🌨️❄️ Rare snowfall dusts the Sahara Desert near Ain Sefra, Algeria.
— AccuWeather (@accuweather) January 20, 2026
Located on the northern edge of the Sahara, Ain Sefra sees snow every few years, and it usually melts quickly. pic.twitter.com/L3wucPvYvn
अटलस पर्वत इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं. जब नमी भरी हवा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों पर चढ़ती है, तो वह तेजी से ठंडी होती है. इससे जल वाष्प बर्फ के क्रिस्टल में बदल जाता है और तापमान पर्याप्त रूप से गिरने पर यह बर्फ के रूप में गिरती है.
अइन सेफरा में बर्फबारी असामान्य है लेकिन अप्रत्याशित नहीं. 1979, 2018, 2021 और 2023 में भी यहां बर्फबारी दर्ज की गई थी. यह बर्फ आमतौर पर कुछ घंटों या दिनों में सूर्य की गर्मी से पिघल जाती है और कभी-कभी रेत के साथ मिलकर नारंगी रंग की बर्फ का रूप ले लेती है.
क्या जलवायु परिवर्तन इसका कारण है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं माना जा सकता. हालांकि, आर्कटिक के तापमान में वृद्धि जेट स्ट्रीम के पैटर्न को प्रभावित कर रही है, जिससे असामान्य स्थानों पर अत्यधिक गर्म या ठंडा मौसम होने की संभावना बढ़ रही है.
सऊदी अरब में बर्फबारी
उत्तर पश्चिमी सऊदी अरब के ताबुक प्रांत में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए. दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में एक शक्तिशाली ध्रुवीय फ्रंट ने उच्चतम क्षेत्रों जैसे जाबाल अल-लॉज़ और ट्रोज़ेना हाइलैंड्स में शून्य से नीचे तापमान लाया.
सऊदी अरब के पर्वतीय क्षेत्र भूमध्यसागर से आती नमी को बर्फ में बदल देते हैं. बर्फ से ढके मैदानों में ऊंटों का चलना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, लेकिन स्थानीय मौसम विज्ञानियों के लिए यह वायुमंडलीय प्रणाली का महत्वपूर्ण मिलन है.
यह दृश्य तब बनता है जब उत्तर से आती ठंडी, शुष्क हवाएं अरबी सागर से उठती नम कम दबाव प्रणालियों से टकराती हैं. NASA जैसे संस्थानों के आंकड़े बताते हैं कि यह घटनाएं दुर्लभ हैं, लेकिन ये अरब प्रायद्वीप के बदलते जलवायु पैटर्न की ओर इशारा करती हैं.


