'भाई...की बोतल देना', क्यों DM साहब को खरीदनी पड़ी शराब?

Dehradun DM Savin Bansal Action In Liquor Shop: अक्सर आपने देखा होगी की प्रशासनिक अधिकारी नियमों के खिलाफ हो रही चीजों पर सख्त एक्शन लेते हैं. कई बार वो कार्रवाई करने के लिए बहुत सी तरकीब अपनाते हैं. उसी में से कुछ तरकीब वायरल भी हो जाती है. कुछ ऐसी ही कार्रवाई देहरादून के जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने शराब के ठेके में पहुंचकर की. आइये जानें क्या था पूरा मामला?

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Edited By: JBT Desk

Dehradun DM Savin Bansal Action: देहरादून शहर में शराब ठेकों पर ओवर रेटिंग और अनियमितताओं की लगातार शिकायतें आ रही थीं. इन शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने स्वयं जांच करने का निर्णय लिया. बिना किसी स्टाफ के खुद कार चलाते हुए, वह एक शराब ठेके पर पहुंचे और सामान्य ग्राहक की तरह लाइन में लगकर शराब खरीदी. उन्होंने एक बोतल ली, जिसका निर्धारित मूल्य 660 रुपये था, लेकिन उनसे 680 रुपये वसूले गए.

जैसे ही यह घटना प्रशासन के सामने आई, पूरे शहर में शराब विक्रेताओं में हड़कंप मच गया. जिलाधिकारी के निर्देश पर तुरंत छापेमारी अभियान शुरू किया गया. उप-जिलाधिकारी हरी गिरी ने चूना भट्टा स्थित शराब की दुकान पर छापा मारा. ओवर रेटिंग और अन्य अनियमितताएं पाई गईं. एक ग्राहक से 200 रुपये की बीयर की बोतल 210 रुपये में बेची गई, जो निर्धारित कीमत से अधिक थी.

अनियमितताओं का खुलासा

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि रेट लिस्ट सही स्थान पर प्रदर्शित नहीं थी, जिससे ग्राहकों को वास्तविक कीमतों की जानकारी नहीं मिल रही थी. दुकान के खुलने और बंद होने का समय भी नहीं लिखा था, और कर्मचारियों के पास कोई पहचान पत्र नहीं था. इसके अलावा, बिलिंग मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा था और रजिस्टर में कटिंग और फ्लूड का इस्तेमाल किया गया था. सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई.

भारी जुर्माना लगाया गया

ओल्ड मसूरी रोड पर स्थित ठेके पर 50,000 रुपये, चूना भट्टा की दुकान पर 75,000 रुपये, सर्वे चौक पर 75,000 रुपये और जाखन ठेके पर 50,000 रुपये का चालान किया गया. जिलाधिकारी के निरीक्षण में यह भी देखा गया कि विक्रेता ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे.

पुरानी कार्रवाई और नियमों की अनदेखी

कुछ समय पहले पत्रकार योगेश डिमरी पर हुए हमले के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शराब माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इसके बाद आबकारी विभाग और प्रशासन ने हरिद्वार, देहरादून और उधम सिंह नगर जिलों में छापेमारी की थी, जहां ओवर रेटिंग और अवैध शराब की बिक्री जैसे कई मामले सामने आए थे.

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