जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पेट संक्रमण के कारण श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती हैं, उनकी हालत स्थिर और जल्द ठीक होने की संभावना है. उन्होंने हालिया आतंकवादी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन सुधार और लद्दाख में सुरक्षा व संवाद पर जोर दिया.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को पेट में संक्रमण के चलते शनिवार को श्रीनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनकी पार्टी के नेताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि 87 वर्षीय अब्दुल्ला इस सप्ताह की शुरुआत में संक्रमित हुए थे और तब से चिकित्सकीय देखरेख में हैं. उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना जताई गई है.
पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे फारूक अब्दुल्ला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे, लेकिन अब उनकी हालत स्थिर और बेहतर है. उन्हें आज या कल छुट्टी मिलने की उम्मीद है. इस बीच, 87 वर्षीय नेता राजनीतिक रूप से सक्रिय बने हुए हैं और अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं.
हाल ही में फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे और इसके परिणामस्वरूप भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य तनाव भी बना रहा. उन्होंने अपने बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने प्रभावी और तेज़ प्रतिक्रिया के माध्यम से पर्यटकों का विश्वास बहाल किया, जिससे जम्मू-कश्मीर फिर से सुरक्षित और स्वागत योग्य पर्यटन स्थल के रूप में उभरा.
फारूक अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यटन विकास में समावेशिता अत्यंत आवश्यक है और चेनाब, पीर पंजाल जैसी पिछड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों पर समान ध्यान दिया जाना चाहिए. उनका कहना था कि स्थायी और दीर्घकालिक पर्यटन विकास के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने का आग्रह
इसके अलावा, वरिष्ठ नेता ने केंद्र सरकार से लद्दाख में हालिया हिंसक घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि लद्दाख सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण चीन की संभावित घुसपैठ के जोखिम के प्रति संवेदनशील है. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से स्थिति को शांत करे और क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करे.
फारूक अब्दुल्ला का यह सक्रिय रवैया उनके राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, उनके प्रयास यह संदेश देते हैं कि वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सामाजिक-आर्थिक और सुरक्षा मामलों में पूरी तरह से जुड़े हुए हैं और क्षेत्रीय विकास के लिए लगातार योगदान दे रहे हैं.


