क्या दिल्ली में मुस्लिम समुदाय ने कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को वोट दिया है?
दिल्ली में आज वोटिंग खत्म हो चुकी है. अब 8 फरवरी का इंतजार है जब मतगणना के बाद नतीजे सामने आएंगे. इस चुनाव में मेटराइज के सर्वे में इस सवाल का जवाब कुछ हैरान करने वाला है. सर्वे के मुताबिक, मुस्लिम वोटर्स ने कांग्रेस से अधिक भाजपा पर भरोसा जताया है.

दिल्ली में विधानसभा चुनाव का मतदान संपन्न हो चुका है. अब 8 फरवरी को काउंटिंग के बाद यह स्पष्ट होगा कि चौथी बार अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ढाई दशकों के बाद राजधानी में फिर से सत्ता में आएगी. हालांकि, अधिकांश एग्जिट पोल्स के मुताबिक, दिल्ली में इस बार भाजपा की सरकार बनने का अनुमान जताया जा रहा है. वहीं, मेटराइज के सर्वे में दोनों दलों के बीच करीबी मुकाबला दर्शाया गया है.
मेटराइज के सर्वे का निष्कर्ष
मेटराइज के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच बहुत ही करीबी मुकाबला हो सकता है. एग्जिट पोल के मुताबिक, भाजपा को 35-40 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि आम आदमी पार्टी को 32-37 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को इस चुनाव में केवल 0-1 सीटें मिलने की संभावना है.
मुस्लिम वोटर्स का रुझान: एग्जिट पोल्स के आंकड़े
इस चुनाव के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल यह था कि दिल्ली के मुस्लिम वोटर्स का रुख इस बार किस पार्टी की ओर होगा. 2020 में हुए दंगों के बाद, यह अनुमान लगाया जा रहा था कि दिल्ली के मुस्लिम वोटर्स कांग्रेस की ओर लौटेंगे या फिर आम आदमी पार्टी (आप) का समर्थन करेंगे. मेटराइज के सर्वे में इस सवाल का जवाब कुछ हैरान करने वाला है. सर्वे के मुताबिक, मुस्लिम वोटर्स ने कांग्रेस से अधिक भाजपा पर भरोसा जताया है.
भा.ज.पा. को मुस्लिम वोटर्स का समर्थन
मेटराइज के एग्जिट पोल में यह सामने आया कि 67 फीसदी मुस्लिम वोटर्स ने आम आदमी पार्टी को अपना वोट दिया है, जबकि 9 फीसदी ने कांग्रेस को चुना है. दिलचस्प बात यह है कि 11 फीसदी मुस्लिम वोटर्स ने इस बार भाजपा को वोट दिया है. इसके अलावा, अन्य पार्टी को 13 फीसदी मुस्लिम वोट मिलने की संभावना जताई गई है.
क्या बढ़ रही है भाजपा और मुस्लिम वोटर्स के बीच नजदीकी?
अब यह सवाल फिर से उठता है कि क्या मुस्लिम वोटर्स की भाजपा से नजदीकी बढ़ रही है. पिछले कुछ चुनावों में भी ऐसा देखने को मिला है, जहां भाजपा ने कई मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत हासिल की है और पोस्ट पोल सर्वे में भी भाजपा को मुस्लिम वोटर्स का समर्थन मिला. माना जा रहा है कि तीन तलाक के खिलाफ कानून लागू करने के कारण मुस्लिम महिलाएं भाजपा को समर्थन देने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मंचों से इस मुद्दे को उठाया है.


