मैं नाथूराम...राजकोट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नाटक से पहले हॉल में की तोड़फोड़, पुलिस ने 45 लोगों को हिरासत में लिया

'मैं नाथूराम' नाम के एक गुजराती नाटक को लेकर राजकोट में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इस नाटक का कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और हॉल में तोड़फोड़ कर दी. कांग्रेस के लोगों का आरोप था कि इस नाटक में महात्मा गांधी के सिद्धांतों को कमतर दिखाने की कोशिश की गई है. इस घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

रोजकोट : गुजरात के राजकोट में शनिवार की रात कला और राजनीति के टकराव का गवाह बनी. शहर के प्रसिद्ध हेमू गढ़वी हॉल में 'मैं नाथूराम' नामक गुजराती नाटक का मंचन होना था, लेकिन पर्दा उठने से पहले ही वहां भारी हंगामा खड़ा हो गया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नाटक की विषयवस्तु पर कड़ा एतराज जताते हुए न केवल नारेबाजी की, बल्कि हॉल के भीतर तोड़फोड़ भी की. इस हिंसक घटना के चलते पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को पकड़कर थाने ले जाया गया.

क्या है विरोध का मुख्य कारण ?

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि यह नाटक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के महान सिद्धांतों और उनकी वैश्विक छवि को कमतर दिखाने का एक सुनियोजित प्रयास है. राजकोट कांग्रेस के अध्यक्ष राजदीपसिंह जडेजा ने तर्क दिया कि गांधीजी का इस शहर से बहुत गहरा और आत्मिक जुड़ाव रहा है, क्योंकि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से प्राप्त की थी. उनका कहना है कि ऐसी किसी भी कलाकृति को अनुमति नहीं दी जा सकती जो बापू के जीवन मूल्यों पर चोट करती हो.

कार्यकर्ताओं ने नाटक को रद्द करने की मांग की थी 

हंगामे से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने हॉल ट्रस्ट से संपर्क कर नाटक के प्रदर्शन को तुरंत रद्द करने की आधिकारिक मांग की थी. हालांकि, जब आयोजकों ने कार्यक्रम निरस्त करने से मना कर दिया और पुलिस सुरक्षा के साये में मंचन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई. जडेजा ने स्वीकार किया कि विरोध के दौरान कुछ युवा उत्तेजित हो गए और उन्होंने मंच पर रखे हुए लोहे के पाइप फेंक दिए, जिससे हॉल की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा.

भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया

दूसरी तरफ, नाटक के निर्माता परितोष पेंटर ने कांग्रेस के इन तमाम आरोपों को पूरी तरह निराधार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास नाटक के प्रदर्शन के लिए सभी आवश्यक सेंसर सर्टिफिकेट और स्थानीय पुलिस की लिखित अनुमति पहले से मौजूद थी. पेंटर के अनुसार, करीब 200 से 300 लोगों की भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया और कलाकारों के साथ-साथ वहां आए दर्शकों के मन में भी डर पैदा किया.

नाटक एक पूर्व प्रकाशित पुस्तक पर आधारित 

इस विवाद के केंद्र में मौजूद नाटक एक पूर्व प्रकाशित पुस्तक पर आधारित है, जिसमें मुख्य रूप से अदालत में दिए गए नाथूराम गोडसे के ऐतिहासिक बयानों को दर्शाया गया है. निर्माता का दावा है कि उन्होंने इस नाटक के जरिए किसी को सही या गलत ठहराने की कोशिश नहीं की है, बल्कि केवल तथ्यों को मंच पर प्रस्तुत किया है. उनका तर्क है कि एक लोकतांत्रिक समाज में दर्शकों को यह तय करने का पूरा अधिकार होना चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं.

पुलिस ने 45 लोगों को हिरासत में लिया 

घटना के तुरंत बाद एक्शन में आई स्थानीय पुलिस ने 45 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है और मामले की एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. सुरक्षा कारणों से हॉल के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. इस कड़वे अनुभव के बावजूद, नाटक के आयोजक अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं. उनकी योजना आगामी दिनों में गुजरात के अन्य शहरों में भी इस नाटक के शो आयोजित करने की है.

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