तेलंगाना ने शराब में मचाया धमाल, नए साल की रात में राजस्व 352 करोड़ तक पहुंचा
दिसंबर 2025 में तेलंगाना में शराब की बिक्री ने रिकॉर्ड ₹5,102 करोड़ का राजस्व हासिल कर इतिहास रचा. त्योहारों और स्थानीय सरपंच चुनावों के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शराब की मांग में भारी वृद्धि देखी गई.

दिसंबर 2025 में तेलंगाना में शराब की बिक्री ने इतिहास रच दिया है. राज्य के आबकारी विभाग ने इस महीने कुल ₹5,102 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो सामान्य मासिक औसत से कहीं अधिक है. इस अभूतपूर्व वृद्धि का प्रमुख कारण साल के अंत में होने वाले त्योहार और राज्य में चल रहे स्थानीय सरपंच चुनाव माने जा रहे हैं.
31 दिसंबर को ₹352 करोड़ की बिक्री दर्ज
राजस्व में हुई इस तेजी का सबसे बड़ा हिस्सा 30 और 31 दिसंबर के मात्र 48 घंटों में आया, जब राज्य के खजाने में ₹727 करोड़ से अधिक की राशि जमा हुई. इनमें से अकेले 31 दिसंबर को ₹352 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई. यह पिछले वर्ष की तुलना में ₹1,600 करोड़ अधिक है, जिससे 45% की वार्षिक वृद्धि दर सामने आई.
बाजार के रुझानों में इस बार बदलाव देखे गए हैं. बीयर की बिक्री में गिरावट आई, क्योंकि 650 मिलीलीटर की बोतल की कीमत ₹150 से बढ़कर ₹180 हो गई और ठंड के मौसम ने खपत को प्रभावित किया. इसके विपरीत, व्हिस्की, ब्रांडी और रम जैसी हार्ड लिकर की मांग में भारी उछाल देखने को मिला, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई. इसके अलावा, 1 दिसंबर से लागू नई शराब नीति, जिसमें आवेदन शुल्क और लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी की गई है, उसने भी राज्य की आय को मजबूती दी.
ग्रामीण इलाकों में भी शराब की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि
शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी शराब की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई. वारंगल, नालगोंडा और महबूबनगर जैसे जिलों में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में रिकॉर्ड बिक्री हुई, जिसका संबंध स्थानीय चुनाव प्रचार से जोड़ा जा रहा है. चुनाव के चलते बने उत्सव और कार्यक्रमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की मांग बढ़ा दी.
अब आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही (जनवरी–मार्च) के लिए ₹10,000 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. अधिकारियों का मानना है कि संक्रांति और मेदाराम जात्रा जैसे बड़े आयोजन भी इस बढ़ती हुई बिक्री को आगे बढ़ाएंगे और आने वाले महीनों में राजस्व की यह गति बनी रहेगी.


