संक्रांति पर आरजेडी में सियासी ठंड, तेज प्रताप अलग चूल्हे पर पका रहे खिचड़ी
संक्रांति के मौके पर लालू यादव की गैरमौजूदगी और तेजस्वी यादव के नदारद रहने से आरजेडी में परिवार और सियासत दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं. इसी बीच तेज प्रताप यादव की बढ़ती सियासी सक्रियता ने पार्टी के भीतर नई हलचल और अटकलों को जन्म दिया है.

बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा और लालू प्रसाद यादव का रिश्ता किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा है. मकर संक्रांति हो या होली, छठ हो या कोई बड़ा पर्व पटना स्थित लालू-राबड़ी आवास सालों से राजनीतिक जुटान का केंद्र रहा है.
दही-चूड़ा भोज पर असमंजस की स्थिति
हर साल मकर संक्रांति पर होने वाला दही-चूड़ा भोज न सिर्फ परंपरा रहा है, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का भी मंच रहा है. लेकिन इस बार इस आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वजह साफ है- लालू प्रसाद यादव की कमजोर होती सेहत, चुनावी हार के बाद बदला सियासी माहौल और परिवार के भीतर चल रही खींचतान.
लालू यादव फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से दूर हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी लंबे समय से बिहार से बाहर हैं. ऐसे में 10 सर्कुलर रोड स्थित वह सरकारी आवास, जिसने दो दशकों तक दही-चूड़ा भोज की मेजबानी की, इस बार आयोजन का गवाह बनेगा या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच लालू परिवार से अलग हो चुके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी अलग राजनीतिक चाल चल दी है.
तेज प्रताप यादव इस बार 26 स्टैंड रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर दही-चूड़ा भोज आयोजित करने की तैयारी में जुटे हैं. वह खुद घूम-घूमकर लोगों को न्योता दे रहे हैं. खास बात यह है कि उन्होंने फिलहाल परिवार के सदस्यों को आमंत्रण नहीं दिया है, लेकिन सियासी विरोधियों और गैर-आरजेडी नेताओं तक न्योता पहुंचा चुके हैं. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा से लेकर उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री पुत्र तक, तेज प्रताप सभी से मुलाकात कर चुके हैं. अब उनकी नजर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के समय पर टिकी है.
तेज प्रताप यादव ने क्या कहा?
तेज प्रताप यादव का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं और व्यक्तिगत रिश्ते अपनी जगह. दरअसल, अनुष्का यादव प्रकरण के बाद लालू यादव ने चुनाव से पहले तेज प्रताप को पार्टी और परिवार दोनों से अलग कर दिया था. इसके बाद से तेज प्रताप अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटे हैं. जदयू नेता नीरज कुमार का आरोप है कि तेज प्रताप लालू की अस्वस्थता और तेजस्वी की गैरमौजूदगी का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं. वहीं भाजपा नेता भी इसी बहाने तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि तेज प्रताप इस सियासी भोज के जरिए कई निशाने साधना चाहते हैं. एक ओर वह खुद को लालू यादव का असली राजनीतिक वारिस साबित करना चाहते हैं, तो दूसरी ओर विधान परिषद की संभावित सीट के लिए भी जमीन तैयार कर रहे हैं. परिवार में जारी कलह, चुनावी हार और बदलते समीकरणों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या लालू की गैरमौजूदगी में तेज प्रताप की राजनीतिक खिचड़ी पक पाएगी या नहीं. क्या इस बार दही-चूड़ा में सियासत से ज्यादा मिठास घुल पाएगी.


