जब महावीर अर्जुन को श्राप के कारण बनना पड़ा था किन्नर, जानें महाभारत का चौंकाने वाला अध्याय
महाभारत में अर्जुन को अप्सरा उर्वशी के श्राप के कारण एक वर्ष तक किन्नर रूप में रहना पड़ा. यही श्राप अज्ञातवास में उनके लिए वरदान साबित हुआ, जब उन्होंने बृहन्नला बनकर मत्स्य देश में समय बिताया.

महाभारत को अक्सर केवल एक महान युद्ध की कहानी माना जाता है, लेकिन वास्तव में यह ग्रंथ जीवन के हर पहलू को छूता है. इसमें धर्म, कर्म, प्रेम, त्याग, अहंकार और पश्चाताप से जुड़ी अनगिनत कथाएं हैं. इन्हीं कथाओं में से एक बेहद रोचक और चौंकाने वाली कहानी है महावीर योद्धा अर्जुन की, जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि महान धनुर्धर अर्जुन को भी एक अप्सरा के श्राप का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण उन्हें एक वर्ष तक किन्नर के रूप में जीवन बिताना पड़ा.
दिव्य अस्त्रों की तलाश में अर्जुन
वनवास के दौरान पांडवों को यह आभास हो चुका था कि आने वाले समय में महायुद्ध निश्चित है. अर्जुन समझते थे कि ऐसे युद्ध में विजय के लिए साधारण शस्त्र पर्याप्त नहीं होंगे. इसी कारण उन्होंने दिव्य अस्त्रों को प्राप्त करने का निश्चय किया। इसके लिए अर्जुन ने अपने पिता और देवताओं के राजा इंद्र की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर इंद्र ने उन्हें वरदान मांगने को कहा.
अर्जुन ने इंद्र से दिव्य अस्त्रों की मांग की. इंद्र ने बताया कि इसके लिए पहले भगवान शिव को प्रसन्न करना आवश्यक है. अर्जुन ने घोर तपस्या कर महादेव को प्रसन्न किया और उनसे पाशुपतास्त्र प्राप्त किया. इसके बाद उनके लिए स्वर्गलोक का मार्ग खुला, जहां इंद्र ने उन्हें अनेक दिव्य अस्त्र प्रदान किए.
अप्सरा उर्वशी ने दिया श्राप
स्वर्गलोक में रहते हुए अर्जुन के जीवन में एक अनोखी घटना घटी. स्वर्ग की अत्यंत सुंदर और प्रसिद्ध अप्सरा उर्वशी अर्जुन के साहस, संयम और रूप से आकर्षित हो गईं. उन्होंने अर्जुन के सामने अपने प्रेम का प्रस्ताव रखा. लेकिन अर्जुन ने उन्हें माता समान बताते हुए विनम्रता से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया. यह अस्वीकार उर्वशी को अपमान जैसा लगा और वे क्रोध से भर उठीं.
क्रोध में आकर उर्वशी ने अर्जुन को नपुंसक होने का श्राप दे दिया. यह सुनकर अर्जुन स्तब्ध रह गए. एक महान योद्धा के लिए यह श्राप किसी बड़े आघात से कम नहीं था. दुखी होकर अर्जुन इंद्र के पास पहुंचे और इस श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा. इंद्र ने अर्जुन को समझाया कि यह श्राप पूरी तरह व्यर्थ नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि यह श्राप अर्जुन के अज्ञातवास के समय उनके काम आएगा. श्राप के प्रभाव से अर्जुन एक वर्ष तक किन्नर रूप में रहेंगे और उसके बाद स्वतः मुक्त हो जाएंगे.
अज्ञातवास में लिया बृहन्नला का रूप
अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने बृहन्नला का रूप धारण किया और मत्स्य देश पहुंचे. वहां उन्होंने राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य और संगीत की शिक्षा दी. इसी दौरान बाकी पांडव और द्रौपदी भी अलग-अलग रूप और नाम से वहीं रहे. किसी को उनके असली स्वरूप का पता नहीं चला.


