गुजरात के राजकोट में 4 घंटे में 9 बार कांपी धरती, लोगों से सतर्क रहने की अपील
गुजरात के राजकोट जिले में चार घंटे के भीतर नौ बार भूकंप के झटके महसूस किए गए. 2.7 से 3.8 तीव्रता के झटकों से लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए, प्रशासन अलर्ट पर है.

राजकोट: गुजरात के राजकोट जिले में शुक्रवार को लगातार भूकंप के कई झटकों ने लोगों को डरा दिया है. हालात ऐसे रहे कि लोग अपने घरों में टिक नहीं पाए और बार-बार बाहर निकलने को मजबूर हुए. महज चार घंटे के भीतर नौ बार धरती कांपी, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया. भूकंप के झटकों के कारण लोग घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं.
राजकोट जिले के उपलेटा इलाके में शुक्रवार सुबह से ही भूकंप के झटके महसूस किए गए. सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर पहला झटका आया, जिसे लोगों ने साफ तौर पर महसूस किया. इसके बाद अगले एक घंटे के अंदर ही छह और झटके दर्ज किए गए. इन भूकंपों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.7 से लेकर 3.8 तक मापी गई. लगातार झटकों के कारण लोग सहमे रहे और किसी अनहोनी की आशंका से बाहर खुले स्थानों पर खड़े रहे.
गुरुवार रात से ही शुरू हुई हलचल
भूकंप की यह गतिविधि गुरुवार रात से ही शुरू हो गई थी. गुरुवार रात करीब 8 बजकर 43 मिनट पर भी 3.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. जानकारी के मुताबिक, सभी झटकों का केंद्र उपलेटा से लगभग 27 किलोमीटर के आसपास रहा. उपलेटा के साथ-साथ धोराजी और जेतपुर क्षेत्रों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.
भूकंप की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की टीमें मौके पर पहुंचीं. इमारतों और सार्वजनिक स्थानों की जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है. साथ ही कहा गया है कि जरूरत न हो तो कमजोर इमारतों में न जाएं और सतर्क रहें. डर के माहौल को देखते हुए जेतपुर में स्कूलों में एहतियातन छुट्टी भी घोषित कर दी गई है.
गुजरात में भूकंप का पुराना इतिहास
गुजरात भूकंप के लिहाज से संवेदनशील राज्यों में गिना जाता है. साल 2001 में आए भुज भूकंप की याद आज भी लोगों के दिलों में ताजा है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई थी. कच्छ के साथ-साथ राजकोट का इलाका भी भूकंप जोन में आता है. यही वजह है कि यहां छोटे-बड़े झटके समय-समय पर महसूस होते रहते हैं.
हाल के महीनों में बढ़ी गतिविधि
पिछले कुछ महीनों में गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में भूकंप के कई छोटे झटके दर्ज किए गए हैं. दिसंबर 2025 में भी गिर सोमनाथ और कच्छ इलाके में धरती कांपने की घटनाएं सामने आई थीं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल का नतीजा हो सकता है.
भूकंप विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार आ रहे छोटे झटकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह किसी बड़े भूकंप का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, आपदा से बचाव की जानकारी रखने और मजबूत निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत है. प्रशासन और विशेषज्ञ दोनों ही लोगों से सावधानी बरतने और जागरूक रहने की अपील कर रहे हैं.


