पेंटागन की सख्ती के खिलाफ एंथ्रोपिक का बड़ा कदम, कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने पेंटागन द्वारा “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है. विवाद के बीच ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा कि किसी निजी कंपनी से सरकार ज्यादा शक्तिशाली होनी चाहिए.

Shraddha Mishra

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में इन दिनों बड़ा विवाद देखने को मिल रहा है. अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक और अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. पेंटागन ने कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “आपूर्ति श्रृंखला जोखिम” घोषित कर दिया है. इस फैसले के बाद एंथ्रोपिक ने इसे गलत बताते हुए अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है. इसी बीच ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी निजी कंपनी सरकार से बड़ी नहीं हो सकती.

4 मार्च को अमेरिकी रक्षा विभाग ने एंथ्रोपिक को एक आधिकारिक पत्र भेजा. इसमें कहा गया कि कंपनी को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है. यदि यह निर्णय लागू रहता है, तो अमेरिका के रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी ठेकेदारों को एंथ्रोपिक के साथ अपने कारोबारी संबंध खत्म करने पड़ सकते हैं. आमतौर पर अमेरिकी सरकार इस तरह का दर्जा विदेशी कंपनियों को देती है, खासकर उन कंपनियों को जिन पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठते हैं. पहले चीन की टेक कंपनी हुआवेई के मामले में भी ऐसा ही कदम उठाया गया था. इसलिए किसी अमेरिकी कंपनी को इस सूची में डालना असामान्य माना जा रहा है.

अदालत जाने की तैयारी में कंपनी

एंथ्रोपिक ने पेंटागन के इस फैसले को अनुचित बताया है. कंपनी का कहना है कि यह कदम कानूनी रूप से सही नहीं है. इसी कारण उसने अदालत में जाकर इस फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है. कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने उपयोगकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि इस विवाद का सामान्य ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उनके अनुसार यह प्रतिबंध केवल उन सेवाओं पर लागू होगा जो सीधे तौर पर अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुबंध से जुड़ी हैं.

विवाद की जड़ क्या है

रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन चाहता था कि एंथ्रोपिक अपने एआई सिस्टम के इस्तेमाल पर कुछ ढील दे और सरकार को व्यापक उपयोग की अनुमति दे. लेकिन कंपनी ने यह शर्त मानने से इनकार कर दिया. एंथ्रोपिक को आशंका थी कि उसके एआई टूल्स का इस्तेमाल बड़े स्तर पर निगरानी या स्वायत्त हथियार बनाने में किया जा सकता है. इसी वजह से कंपनी ने पेंटागन की मांगों को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद यह विवाद सामने आया.

सैम ऑल्टमैन की टिप्पणी

इस पूरे मामले के बीच ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने भी प्रतिक्रिया दी. मॉर्गन स्टेनली की टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकॉम कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सरकार का अधिकार निजी कंपनियों से अधिक होना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई पर परोक्ष टिप्पणी मानी जा रही है.

ट्रंप फंडिंग को लेकर भी उठा विवाद

पेंटागन के साथ एंथ्रोपिक का अनुबंध खत्म होने के बाद ओपनएआई ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ समझौता किया. इसके बाद खबर सामने आई कि अमोदेई ने अपने कर्मचारियों को भेजे एक संदेश में कहा था कि ओपनएआई को यह मौका इसलिए मिला क्योंकि उसके कुछ नेताओं ने पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान को राजनीतिक चंदा दिया था.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ओपनएआई के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन और उनकी पत्नी ने ट्रंप के सुपर पीएसी को लगभग 25 मिलियन डॉलर का दान दिया था. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सैम ऑल्टमैन ने कहा कि अगर कोई कंपनी केवल इसलिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूरी बना ले क्योंकि उसे सत्ता में बैठे लोगों से आपत्ति है, तो यह समाज के लिए ठीक नहीं है.

ओपनएआई का पक्ष

ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि ओपनएआई ने पेंटागन के साथ समझौता इसलिए किया ताकि स्थिति और खराब न हो. उनके अनुसार उस समय हालात तेजी से बिगड़ रहे थे और तनाव कम करना जरूरी था. हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि इस समझौते को लेकर कुछ लोगों को लगा कि कंपनी जल्दबाजी में फैसला ले रही है. इसी वजह से बाद में समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव भी किया गया.

उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया

पेंटागन के साथ हुए समझौते के बाद ओपनएआई को ऑनलाइन काफी आलोचना का सामना करना पड़ा. कई उपयोगकर्ताओं ने विरोध में चैटजीपीटी को अपने फोन और कंप्यूटर से हटाना शुरू कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक चैटजीपीटी को अनइंस्टॉल करने की संख्या लगभग 300 प्रतिशत तक बढ़ गई. दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग एंथ्रोपिक के क्लाउड चैटबॉट की ओर शिफ्ट हो गए.

एंथ्रोपिक के प्लेटफॉर्म पर अचानक बढ़ी ट्रैफिक के कारण उसके क्लाउड सिस्टम को दो बार आउटेज का भी सामना करना पड़ा. कंपनी के प्रमुख अमोदेई का कहना है कि पेंटागन की शर्तों को न मानने के कारण जनता की नजर में कंपनी की छवि मजबूत हुई है और कई लोग इसे साहसी कदम मान रहे हैं.

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