डिग्री के बिना भी Google दे रहा जॉब, फाउंडर सर्गी ब्रिन ने बताया कारण
पिछले 5 सालों में गूगल में बिना कॉलेज डिग्री वालों की भर्ती 16% बढ़ गई है. सर्गेई ब्रिन ने हाल ही में खुलासा किया कि कंपनी ने कई महत्वपूर्ण रोल्स से डिग्री की अनिवार्यता हटा दी है.

नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी की दुनिया में नौकरी पाने के पारंपरिक नियम तेजी से बदल रहे हैं. अब सिर्फ कॉलेज डिग्री ही अच्छी सैलरी वाली नौकरी की गारंटी नहीं रही. दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google भी इस बदलाव की अगुवाई कर रही है, जहां बिना कॉलेज डिग्री वाले प्रोफेशनल्स के लिए भी बड़े मौके खुल रहे हैं.
बर्निंग ग्लास इंस्टीट्यूट के डेटा के मुताबिक, साल 2017 से 2022 के बीच Google की उन जॉब पोस्टिंग्स में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिनमें कॉलेज डिग्री को अनिवार्य शर्त माना जाता था. जहां पहले 93 प्रतिशत नौकरियों में डिग्री जरूरी थी, वहीं यह आंकड़ा घटकर 77 प्रतिशत रह गया है. यानी महज पांच सालों में बिना डिग्री Google में नौकरी पाने वालों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत बढ़ी है. इस बदलाव की वजह खुद Google के को-फाउंडर सर्गी ब्रिन ने बताई है.
बिना डिग्री वालों को नौकरी क्यों दे रहा है Google?
हाल ही में Google के को-फाउंडर सर्गी ब्रिन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स से बातचीत के दौरान इस ट्रेंड पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि Google कभी भी सिर्फ एकेडमिक बैकग्राउंड के आधार पर हायरिंग करने वाली कंपनी नहीं रही है. कंपनी ने कई पदों के लिए कॉलेज डिग्री की अनिवार्यता को कम कर दिया है.
एक रिपोर्ट के अनुसार, सर्गी ब्रिन ने कहा है कि हमने बहुत सारे एकेडमिक स्टार्स को हायर किया है, लेकिन हमने ऐसे बहुत से लोगों को भी हायर किया है जिनके पास बैचलर डिग्री नहीं है. वे बस एक कोने बैठकर खुद ही चीजें सीख लेते हैं.
एंट्री-लेवल जॉब्स पर AI का गहरा असर
इस बदलाव के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बड़ी वजह बनकर उभरा है. AI ने कम समय में एंट्री-लेवल नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है. अब कंपनियां डिग्री से ज्यादा स्किल्स पर ध्यान दे रही हैं.
जैसे-जैसे AI एंट्री-लेवल टास्क्स को ऑटोमेट कर रहा है, वैसे-वैसे कंपनियां यह दोबारा सोचने लगी हैं कि टैलेंट को पहचानने का सही तरीका क्या है. नतीजतन, फॉर्मल डिग्री की जगह प्रैक्टिकल स्किल्स और सीखने की क्षमता को ज्यादा अहमियत दी जा रही है. यह बदलाव यूनिवर्सिटीज की वजह से नहीं, बल्कि उन एम्प्लॉयर्स के कारण हो रहा है जो स्किल-बेस्ड हायरिंग को अपना रहे हैं.
सर्गी ब्रिन ने कंप्यूटर साइंस क्यों चुना?
अपने एकेडमिक फैसलों पर बात करते हुए सर्गी ब्रिन ने बताया कि उन्होंने किसी रणनीति के तहत नहीं, बल्कि अपने इंटरेस्ट की वजह से कंप्यूटर साइंस को चुना था. उन्होंने कहा कि मैंने कंप्यूटर साइंस इसलिए चुना क्योंकि ये मेरा पैशन था. यह मेरे लिए एक तरह से बहुत आसान फैसला था. मुझे लगता है कि आप कह सकते हैं कि मैं लकी भी था क्योंकि मैं इतने ट्रांसफॉर्मेटिव फील्ड में था.
युवाओं को सर्गी ब्रिन की खास सलाह
ब्रिन ने स्टूडेंट्स को सिर्फ ऑटोमेशन के डर के आधार पर करियर से जुड़े फैसले लेने से भी आगाह किया. उन्होंने कहा कि AI कुछ डिसिप्लिन्स को खत्म कर सकता है, लेकिन कुछ में उसका असर अलग तरह का होता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं इसलिए कंपैरेटिव लिटरेचर में स्विच नहीं करूंगा क्योंकि आपको लगता है कि AI कोडिंग में अच्छा है. ईमानदारी से कहूं तो, AI शायद कंपैरेटिव लिटरेचर में और भी बेहतर है.
सिर्फ Google नहीं, दूसरी टेक कंपनियां भी इसी राह पर
डिग्री बनाम स्किल्स की यह बहस सिर्फ Google तक सीमित नहीं है. Microsoft, Apple और Cisco जैसी बड़ी कंपनियां भी अब डिग्री की बजाय स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं. इन कंपनियों में भी क्रेडेंशियल-बेस्ड स्क्रीनिंग की जगह स्किल-बेस्ड हायरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे डिग्री की अनिवार्यता धीरे-धीरे कम हो रही है.
एलन मस्क का बड़ा बयान
इस बहस में टेस्ला और स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क भी शामिल हैं. उनका मानना है कि AI के दौर में कॉलेज जाना अब उतना जरूरी नहीं रह गया है. एक पॉडकास्ट के दौरान एलन मस्क ने शिक्षा और AI को लेकर कहा कि मेडिकल कॉलेज जाना अब ‘बेकार’ है.
उन्होंने मेडिकल फील्ड में AI की तेजी से बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले कुछ सालों में AI रोबोट इंसानों को बेहतर मेडिकल सुविधाएं दे सकते हैं और लोगों को ह्यूमन डॉक्टर्स से भी बेहतर हेल्थकेयर मिल सकती है.


