AI ने दबाया न्यूक्लियर बटन! ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने AI टूल्स का किया इस्तेमाल, युद्ध के बीच हुआ चौकाने वाला खुलासा

ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल ने बड़े हमले किए, जिसमें कई लोगों की जान चली गई. इस हमले के बीच एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने हमलों की योजना बनाने में AI का इस्तेमाल किया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया. जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों से इजरायल और अमेरिकी बेस पर हमला किया. इस जंग में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और स्थिति और बिगड़ती जा रही है.

जंग में AI की बड़ी भूमिका

इस संघर्ष में सिर्फ हथियार और जेट ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी अहम भूमिका निभा रहा है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिकी सेना ने हमलों की योजना बनाने में AI टूल्स का इस्तेमाल किया. खास तौर पर Anthropic के Claude मॉडल का नाम सामने आया है.

AI सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन वीडियो और अन्य खुफिया जानकारी को बहुत तेजी से जांचता है. इंसानों को इसमें घंटों लगते, लेकिन AI मिनटों में दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर टारगेट लिस्ट तैयार कर देता है. हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेते हैं, लेकिन AI से सलाह लेकर योजना बनाई जा रही है.

सिमुलेशन में AI ने न्यूक्लियर बटन दबाया

हाल ही में एक चौंकाने वाली स्टडी आई है, जिसने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी. किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर केनेथ पेन ने OpenAI के GPT-5.2, Anthropic के Claude Sonnet 4 और Google के Gemini 3 Flash जैसे बड़े AI मॉडल्स को वॉर गेम सिमुलेशन में डाला. 

इन मॉडल्स को न्यूक्लियर हथियारों की कमान दी गई और विभिन्न संकट स्थितियों में फैसले लेने को कहा गया. नतीजा हैरान करने वाला था. 21 सिमुलेशन गेम्स में से 95 प्रतिशत में AI ने न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल चुना. ज्यादातर मामलों में टैक्टिकल न्यूक्लियर (छोटे स्तर के) हमले हुए, और कई में स्ट्रैटेजिक (बड़े) न्यूक्लियर खतरे भी मंडराए.

AI इंसानों की तरह न्यूक्लियर टैबू (नैतिक रोक) से बंधा नहीं होता. यह सिर्फ डेटा, जीत-हार के गणित और रणनीति देखता है. इसलिए यह आसानी से न्यूक्लियर विकल्प को सही ठहरा देता है, जबकि इंसान में डर और नैतिकता काम करती है.

भविष्य की जंग में मशीनों का खेल

अमेरिका-इजरायल और ईरान के इस टकराव ने साफ कर दिया है कि अब युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि सर्वर और एल्गोरिद्म में भी लड़ा जा रहा है. जो देश AI और डेटा में आगे होगा, उसे फायदा मिलेगा, लेकिन अगर AI फैसले लेने लगे या सलाह में हमेशा टकराव बढ़ाने की बात करे, तो दुनिया कितनी सुरक्षित रहेगी? 

यह सवाल गंभीर है कि क्या भविष्य में AI को इतना कंट्रोल दिया जाए कि वह न्यूक्लियर बटन तक पहुंच जाए. फिलहाल इंसान ही अंतिम फैसला ले रहे हैं, लेकिन सिमुलेशन दिखाते हैं कि मशीनें ज्यादा आक्रामक हो सकती हैं.

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