साइबर फ्रॉड से बचना है तो बदलें ये आदत, जानिए Digital Password बनाने का सही तरीका
आसान और छोटे पासवर्ड साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते हैं. सुरक्षित रहने के लिए लंबा और जटिल पासवर्ड बनाना, हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखना और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करना बेहद जरूरी है.

आज के समय में हमारा बैंकिंग काम, सोशल मीडिया, ईमेल और यहां तक कि निजी बातचीत भी ऑनलाइन हो चुकी है. ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती है. हैरानी की बात है कि डिजिटल दौर में भी लोग 1234, password या अपनी जन्मतिथि जैसे आसान पासवर्ड इस्तेमाल कर रहे हैं. यही आदत साइबर अपराधियों को मौका देती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि मजबूत पासवर्ड आपकी डिजिटल जिंदगी की पहली सुरक्षा दीवार है. इसलिए इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.
मजबूत पासवर्ड का पहला नियम है कि वह लंबा और जटिल हो. कम से कम 12 से 16 अक्षरों का पासवर्ड अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसमें बड़े और छोटे अक्षरों के साथ अंक और विशेष चिन्ह शामिल होने चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर पासवर्ड में अलग-अलग प्रकार के कैरेक्टर होंगे तो उसे तोड़ना काफी मुश्किल हो जाता है. छोटे और साधारण शब्दों वाले पासवर्ड हैकर्स के लिए आसान लक्ष्य होते हैं.
व्यक्तिगत जानकारी से बचें
बहुत से लोग अपना नाम, मोबाइल नंबर, जन्मदिन या 123456 जैसे सामान्य पैटर्न को पासवर्ड बना लेते हैं. यह सबसे बड़ी गलती है. साइबर अपराधी सबसे पहले ऐसे ही सामान्य संयोजन आजमाते हैं. इसलिए पासवर्ड बनाते समय निजी जानकारी से पूरी तरह दूरी रखें.
बेहतर तरीका यह है कि आप किसी वाक्य या ऐसे शब्दों का मेल बनाएं जो आपके लिए याद रखना आसान हो, लेकिन दूसरों के लिए अनुमान लगाना मुश्किल. उदाहरण के तौर पर, आप अलग-अलग शब्दों, नंबर और चिन्हों को मिलाकर अनोखा पासवर्ड बना सकते हैं. ध्यान रहे कि किसी और का तैयार पासवर्ड सीधे इस्तेमाल न करें, बल्कि उसी तरह की सोच से अपना अलग संयोजन तैयार करें.
हर प्लेटफॉर्म के लिए अलग पासवर्ड रखें
एक ही पासवर्ड को कई वेबसाइट या ऐप पर इस्तेमाल करना बेहद जोखिम भरा है. यदि किसी एक साइट का डेटा लीक हो गया, तो बाकी सभी अकाउंट भी खतरे में आ सकते हैं. इसलिए बैंक, ईमेल, सोशल मीडिया और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए अलग-अलग पासवर्ड बनाएं. अगर कई पासवर्ड याद रखना मुश्किल हो, तो भरोसेमंद पासवर्ड मैनेजर का सहारा लिया जा सकता है. यह आपके पासवर्ड को सुरक्षित तरीके से संभालकर रखता है.
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से बढ़ाएं सुरक्षा
सिर्फ मजबूत पासवर्ड बनाना काफी नहीं है. उसके साथ टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करना भी जरूरी है. इससे लॉगिन करते समय एक अतिरिक्त सुरक्षा स्तर जुड़ जाता है. उदाहरण के लिए, पासवर्ड डालने के बाद आपके मोबाइल पर ओटीपी आता है या किसी ऑथेंटिकेटर ऐप से कोड मिलता है. इससे यदि पासवर्ड किसी को पता भी चल जाए, तो बिना दूसरे चरण के अकाउंट खोलना संभव नहीं होगा.


