थलापति विजय के लिए खुला सत्ता का रास्ता, कांग्रेस के सपोर्ट से मचा सियासी बवाल
सुपरस्टार थलापति विजय अब पावर के दरवाजे पर हैं लेकिन गद्दी तक पहुंचने के लिए उन्हें दूसरों के सपोर्ट की जरूरत होगी. अच्छी राहत यह है कि कांग्रेस उन्हें सपोर्ट करने के लिए तैयार है.

New Delhi: इस बार तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में जनादेश सिर्फ जीत और हार का नहीं है बल्कि यह पावर के नए डायनामिक्स भी बना रहा है. सिल्वर स्क्रीन से पॉलिटिक्स में जबरदस्त एंट्री करने वाले सुपरस्टार थलापति विजय अब पावर के दरवाजे पर हैं लेकिन गद्दी तक पहुंचने के लिए उन्हें दूसरों के सपोर्ट की जरूरत होगी. उनके लिए एक अच्छी राहत यह है कि कांग्रेस उन्हें सपोर्ट करने के लिए तैयार दिख रही है.
कांग्रेस ने किया विश्वासघात
तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है जहां कांग्रेस द्वारा विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के संकेत के बाद DMK ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. DMK नेताओं ने इसे “बैकस्टैबिंग” यानी विश्वासघात करार देते हुए कहा कि कांग्रेस ने न सिर्फ गठबंधन धर्म तोड़ा है बल्कि जनादेश के खिलाफ जाकर फैसला लिया है.
DMK ने कांग्रेस को याद दिलाया कि 2016 के चुनावों में उसने कांग्रेस का साथ दिया था भले ही सीटों का बंटवारा उनके प्रदर्शन के अनुपात में नहीं था. साथ ही जब BJP और RSS राहुल गांधी पर लगातार हमले कर रहे थे तब DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था जिसे एक साहसी कदम माना गया.
कांग्रेस को मिला है फायदा
DMK का दावा है कि जमीनी स्तर पर उसकी मेहनत और संसाधनों की वजह से ही कांग्रेस को चुनावों में फायदा मिला. इसके बावजूद कांग्रेस का TVK के समर्थन में झुकाव DMK को नागवार गुजरा है. उनका आरोप है कि नतीजों के तुरंत बाद कांग्रेस का यह रुख बदलना अन्य सहयोगी दलों के बीच भी अविश्वास पैदा करेगा.
AIADMK के साथ मिलकर बना सकते है सरकार
TVK के 108 MLA एक होटल में रुके हुए हैं जबकि सरकार बनाने की कोशिशें चल रही हैं. जहां कांग्रेस विजय को सपोर्ट करने के लिए तैयार है वहीं AIADMK के अंदर अलायंस को लेकर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. यह भी चर्चा है कि विजय के पास AIADMK के साथ मिलकर सरकार बनाने का विकल्प भी खुला है जिससे तमिलनाडु की सियासत और दिलचस्प हो गई है. अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह दांव राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में क्या असर डालता है.
पार्टी दो खेमों में बंटी
AIADMK के अंदर दो अलग-अलग गुट दिख रहे हैं. पहला गुट TVK के साथ अलायंस का फेवर कर रहा है. दूसरे गुट का मानना है कि ऐसा करने से पार्टी का वजूद और कमजोर हो जाएगा. यही वजह है कि पार्टी के लिए यह फैसला मुश्किल हो गया है. खबर है कि जयललिता की मौत के बाद से AIADMK को कई चुनावी झटके लगे हैं चाहे वो विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव. पार्टी ने जो भी गठबंधन करने की कोशिश की वे असरदार साबित नहीं हुए.


