टूटेगी 75 साल की परंपरा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट में पार्ट 'बी' पर रहेगा फोकस
इस साल का केंद्रीय बजट एक ऐतिहासिक बदलाव लाने वाला है, जो पिछले 75 सालों की पुरानी परंपरा को तोड़ देगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल 1 फरवरी को संसद में अपने बजट भाषण के भाग बी में भारत के आर्थिक भविष्य की एक बड़ी और गहन तस्वीर पेश करेंगी.

नई दिल्लीः इस साल का केंद्रीय बजट एक ऐतिहासिक बदलाव लाने वाला है, जो पिछले 75 सालों की पुरानी परंपरा को तोड़ देगा. सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल 1 फरवरी को संसद में अपने बजट भाषण के भाग बी में भारत के आर्थिक भविष्य की एक बड़ी और गहन तस्वीर पेश करेंगी.
75 साल पुरानी रिवाज में बड़ा बदलाव
पिछले कई दशकों से बजट भाषण को दो हिस्सों में बांटा जाता रहा है. भाग ए में सरकार की योजनाएं, विकास कार्यक्रम और विभिन्न क्षेत्रों के लिए घोषणाएं आती थीं, जबकि भाग बी ज्यादातर करों से जुड़े बदलावों, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर नीतियों और छोटी-मोटी आर्थिक घोषणाओं तक सीमित रहता था. लेकिन इस बार मामला अलग है. सूत्र बताते हैं कि भाग बी को अब सिर्फ टैक्स चेंज का हिस्सा नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसमें भारत की 21वीं सदी की दूसरी तिमाही में एंट्री के साथ-साथ अल्पकालिक जरूरतों और दीर्घकालिक लक्ष्यों दोनों पर गहराई से बात होगी.
इसमें देश की स्थानीय ताकतों जैसे मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति, कृषि और एमएसएमई को वैश्विक मंच पर कैसे मजबूती से पेश किया जाए, इसका रोडमैप भी सामने आएगा. साथ ही भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं, जैसे मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता, निर्यात बढ़ाना और वैश्विक चुनौतियों से निपटना, पर भी रोशनी डाली जाएगी.
अर्थशास्त्रियों की टिकी नजरें
देश-विदेश के कई अर्थशास्त्री इस बदलाव पर करीबी नजर रखे हुए हैं. वे उम्मीद कर रहे हैं कि यह सिर्फ सामान्य कर सुधारों का बजट नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा ब्लूप्रिंट होगा जो भारत को अगले दशकों के लिए मजबूत आर्थिक नींव देगा. वैश्विक मंदी, अमेरिका से आने वाले टैरिफ दबाव और घरेलू मांग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी संकेत मिल सकते हैं.
निर्मला सीतारमण का नौवां बजट
यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां केंद्रीय बजट होगा, जो खुद में एक रिकॉर्ड है. उन्होंने 2019 में पहली बार बजट पेश करते हुए पुराने चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही-खाता इस्तेमाल किया था. तब से यह परंपरा बनी हुई है. पिछले चार सालों की तरह इस बार भी बजट पूरी तरह कागज रहित होगा. डिजिटल टैबलेट पर पेश किया जाएगा, जो पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिकता का प्रतीक है.
यह बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का संग्रह नहीं रहेगा, बल्कि भारत के आर्थिक सपनों को साकार करने का एक मजबूत विजन डॉक्यूमेंट साबित हो सकता है। आम आदमी से लेकर निवेशकों तक सबकी निगाहें कल के भाषण पर टिकी हैं, जहां शायद कुछ ऐसे बड़े संदेश मिलें जो आने वाले वर्षों की दिशा तय करें।


