भारत-ईयू के बीच 'मदर ऑफ डील्स' से शहबाज सरकार में मचा हड़कंप, पाकिस्तान में 1 करोड़ नौकरियों पर आया संकट

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने 27 जनवरी  को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया. इस डील से ट्रंप प्रशासन के 50% टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को यह राहत मिलेगी. मदर ऑफ डील्स से पाकिस्तान सरकार में अफरा-तफरी मची है. उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने आपात अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने 27 जनवरी  को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया. इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है, जो दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी और जीडीपी को जोड़ता है. इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजार में श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, परिधान, जूते और आभूषणों में बड़ा फायदा होगा, जहां पहले 12% तक का शुल्क लगता था. ईयू भारत से 99% वस्तुओं पर शुल्क खत्म या कम करेगा, जबकि भारत भी 97% यूरोपीय सामानों पर ऐसा ही करेगा.

इस डील से ट्रंप प्रशासन के 50% टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को यह राहत मिलेगी. लेकिन पड़ोसी पाकिस्तान में इसकी वजह से बड़ी बेचैनी है. ईयू पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां सालाना करीब 9 अरब डॉलर का निर्यात होता है, मुख्य रूप से कपड़ा और परिधान. जीएसपी+ दर्जे से पाकिस्तान को शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है, जिससे 2014 से यूरोप में उसके वस्त्र निर्यात में 108% की बढ़ोतरी हुई. ईयू पाकिस्तान के कुल वस्त्र निर्यात का 40% हिस्सा खरीदता है.

पाकिस्तान की चिंता

भारत को तुरंत शून्य शुल्क वाली पहुंच मिलने से पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर हो जाएगी. पाकिस्तान का जीएसपी+ दर्जा अगले साल खत्म होने वाला है. ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रमुख कामरान अरशद ने कहा कि भारत कई क्षेत्रों में पाकिस्तान को पीछे छोड़ देगा. पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने चेतावनी दी कि इससे 1 करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं. वस्त्र उद्योग पाकिस्तान में 15-25 मिलियन लोगों को रोजगार देता है.

सरकार में हड़कंप

पाकिस्तान सरकार में अफरा-तफरी मची है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह ईयू के साथ द्विपक्षीय और ब्रुसेल्स स्तर पर संपर्क में है ताकि निर्यात प्रभाव से निपटा जा सके. उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने आपात अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाई, जो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईयू राजदूत की मुलाकात के बाद हुई. शरीफ ने गहरे व्यापार संबंधों और जीएसपी+ जारी रखने पर जोर दिया.

घरेलू सुधारों की जरूरत

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है. विश्व बैंक के अनुसार, 1990 के दशक में निर्यात जीडीपी का 16% था, जो 2024 में घटकर 10% रह गया. निर्यातक ऊर्जा लागत, करों और अक्षमताओं की शिकायत करते हैं. उन्होंने बिजली शुल्क कम करने और प्रोत्साहन की मांग की. जवाब में सरकार ने औद्योगिक बिजली दरों में 4.04 रुपये की कटौती की.

बांग्लादेश पर भी असर

यह समझौता बांग्लादेश के लिए भी चुनौती है, जो एलडीसी दर्जे से शुल्क-मुक्त निर्यात करता है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पहले बांग्लादेश यूरोप से 30 अरब डॉलर कमाता था, लेकिन अब भारत बराबरी पर आएगा. कुल मिलाकर, भारत-ईयू एफटीए ने दक्षिण एशियाई व्यापार की तस्वीर बदल दी है. पाकिस्तान को "शून्य-टैरिफ का सुनहरा दौर" खत्म होने का अहसास हो रहा है. अब घरेलू सुधारों से प्रतिस्पर्धा बनाए रखनी होगी, वरना निर्यात और रोजगार में भारी नुकसान हो सकता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag