EU के बाद अब US की बारी...अमेरिका के साथ कब होगी ट्रेड डील ? केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दिया ये जवाब

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द पूरा होगा, जिसमें कोई बड़ा मुद्दा शेष नहीं है. कनाडा के साथ भी वार्ता प्रारंभिक चरण में है. गोयल ने बताया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण भारत अब मजबूत स्थिति में वार्ता करता है और भविष्य की संभावित अर्थव्यवस्था के आधार पर समझौते कर रहा है, जिससे देश को लाभ मिल रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्द ही पूरा होने की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने इस समझौते को "सकारात्मक" और "अच्छा" बताया, हालांकि कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी. गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी समयसीमा के दबाव में समझौता नहीं करता, बल्कि तब पूरा करता है जब दोनों पक्ष संतुष्ट हों. उनके अनुसार, अब कोई बड़ा मुद्दा शेष नहीं रह गया है जिस पर सहमति बननी बाकी हो.

कनाडा के साथ समझौते को लेकर बहुत उत्सुक 

आपको बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री के मार्च में भारत आने की योजना के संदर्भ में गोयल से पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कनाडा की सरकार इस समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बहुत इच्छुक है. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते पर काम शुरू से शुरू करना होगा और दोनों देश अभी इसके दायरे और शर्तों पर काम कर रहे हैं.

यूके और यूरोपीय संघ, हर देश के लिए अलग रणनीति
गोयल से पूछा गया कि क्या ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते भविष्य के अन्य समझौतों के लिए एक नमूना बन सकते हैं. उन्होंने जवाब दिया कि हर देश की अर्थव्यवस्था का आकार, उसकी स्थितियां और हित अलग-अलग होते हैं. इसलिए, एक समझौते को दूसरे पर पूरी तरह लागू नहीं किया जा सकता. हर समझौता अपने आप में अलग और स्वतंत्र होता है.

यूरोपीय संघ लगातार काम कर रहा...
यूरोपीय संघ के साथ हुए नए मुक्त व्यापार समझौते के बारे में गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ लगातार और ईमानदारी से इस पर काम कर रहा था. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि पिछले छह महीनों में अमेरिकी टैरिफ के कारण यूरोपीय संघ अधिक सहमति देने लगा था. गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ ने 2022 से ही भारत के साथ समझौता करने का मन बना लिया था. 2024 में भारत और फिर यूरोपीय संघ के चुनावों के कारण बातचीत की गति थोड़ी धीमी हुई, लेकिन यूरोपीय संघ का समर्थन बना रहा.

गोयल को विश्वास है कि यूरोपीय संघ की संसद इस समझौते को 2026 में ही मंजूरी दे देगी. उन्होंने जर्मन चांसलर के हवाले से कहा कि यूरोपीय देश चाहते हैं कि यह समझौता जल्द से जल्द पूरा हो ताकि चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा आंतरिक बाजार बन सके.

मोदी के नेतृत्व में भारत की वार्ता रणनीति
गोयल ने बताया कि पहले और आज के भारत की वार्ता रणनीति में बड़ा अंतर आया है. आज भारत एक सम्मानित देश है, जहाँ राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक स्थिरता और निर्णायक नेतृत्व है. दुनिया भारत के प्रतिभा पूल को पहचानती है और अब दूसरे देश भी भारत के साथ व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं.

भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था पर बातचीत करता...
गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्ता की पुरानी रणनीति बदल दी है. अब भारत वर्तमान अर्थव्यवस्था के आधार पर नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के आधार पर बातचीत करता है. आज की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि 2047 की 30 ट्रिलियन डॉलर की संभावित अर्थव्यवस्था के आधार पर समझौते किए जा रहे हैं. इसी सोच के कारण भारत अब समान स्तर पर या फिर अधिक लाभ देने वाले के रूप में वार्ता करता है, जिससे देश को बेहतर समझौते मिलते हैं.

मांग बढ़ेगी तो गुणवत्ता भी बढ़ेगी
यूरोपीय संघ के समझौते से भारत के निर्माण क्षेत्र को कितना बढ़ावा मिलेगा, इस सवाल पर गोयल ने कहा कि इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने बताया कि अधिकांश क्षेत्रों में भारत को पहले दिन से ही शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) का लाभ मिल गया है. 35 अरब डॉलर के श्रम-गहन निर्यात में से 33.5 अरब डॉलर के निर्यात पर पहले दिन से ही कोई शुल्क नहीं लगेगा.

यूरोपीय संघ 253 अरब डॉलर का आयात करता
उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े देते हुए बताया कि बांग्लादेश यूरोपीय संघ को 30 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जबकि भारत का निर्यात केवल 7 अरब डॉलर का है. बांग्लादेश को कम विकसित देश होने के कारण शुल्क मुक्त पहुंच मिलती थी, जबकि भारत को 12% तक का शुल्क देना पड़ता था. अब भारत को भी शून्य शुल्क का लाभ मिल गया है. केवल कपड़ा निर्यात ही 40-50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, क्योंकि यूरोपीय संघ 253 अरब डॉलर का आयात करता है.

गुणवत्ता कैसे सुधरेगी, इस सवाल पर गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे माँग बढ़ेगी, गुणवत्ता अपने आप सुधर जाएगी. यदि भारत 7 अरब डॉलर का निर्यात कर सकता है, तो 70 अरब डॉलर का भी कर सकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत निर्माण और सेवा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन दे रहा है और नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप्स और लॉजिस्टिक्स पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है. भारत विकसित देशों के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी जारी रखेगा.

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