तख्तापलट की अटकलें खारिज, ईरान की सेना हाई अलर्ट पर, विदेश मंत्री की अमेरिका को दो-टूक
अमेरिका और इजरायल से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि तख्तापलट की बातें महज अफवाह हैं, जबकि सेना को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है।

ईरान में इन दिनों सत्ता परिवर्तन की अटकलें उड़ाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को हटाया जा सकता है। लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन बातों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह ख्याली पुलाव है। उनका कहना है कि ईरान की व्यवस्था मजबूत है। बाहरी दबाव से सिस्टम नहीं हिलता। किसी को भ्रम में नहीं रहना चाहिए।
अमेरिका और इजरायल के खतरे पर सेना ने क्या तैयारी की है?
ईरानी सेना प्रमुख अमीर हातमी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले की आशंका को देखते हुए सेना हाई अलर्ट पर है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती पर नजर रखी जा रही है। ईरान की सशस्त्र सेनाएं हर स्थिति के लिए तैयार हैं। किसी भी आक्रामकता का करारा जवाब दिया जाएगा। चेतावनी बिल्कुल साफ शब्दों में दी गई है।
डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की खुली चेतावनी क्या है?
अमीर हातमी ने सीधे तौर पर अमेरिका को चेताया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई गलती की। तो उसकी कीमत उसे खुद चुकानी पड़ेगी। इससे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ेगी। इजरायल की सुरक्षा भी दांव पर लग सकती है। ईरान ने साफ किया कि जवाब सीमित नहीं होगा। पूरी ताकत से दिया जाएगा। यह संदेश सीधे वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया है।
क्या ईरान अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है?
तनाव के बीच ईरान ने बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान संतुलित कूटनीति में विश्वास करता है। बातचीत हो सकती है। लेकिन धमकी के माहौल में नहीं। उन्होंने कहा कि बातचीत हुक्म चलाने जैसी नहीं होती। पहले से नतीजा तय नहीं किया जा सकता। अमेरिका को सम्मान और बराबरी की शर्तों पर आना होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कैसे बढ़ा?
इस महीने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात बिगड़े। अमेरिका ने ईरानी सरकार पर हिंसा का आरोप लगाया। डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए। तेहरान ने इन आरोपों को खारिज किया। ईरान ने कहा कि अशांति के पीछे अमेरिका की भूमिका है। बयानबाजी के बाद तनाव लगातार बढ़ता चला गया।
ईरान के शीर्ष नेताओं ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए?
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने प्रदर्शनों में हुई मौतों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका और इजरायल को कटघरे में खड़ा किया। यूरोपीय देशों पर भी उकसाने का आरोप लगाया गया। ईरान का कहना है कि उसके आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमेरिकी सैन्य जमावड़े से कितना बड़ा खतरा पैदा हुआ है?
बीते एक हफ्ते में अमेरिका ने कई जंगी जहाज ईरान के आसपास तैनात किए हैं। समुद्र में अमेरिकी बेड़े की मौजूदगी बढ़ी है। इससे हमले की आशंका और गहरी हो गई है। ट्रंप के बयानों ने चिंता बढ़ाई है। ईरान ने भी जवाब में चौकसी बढ़ा दी है। आने वाले दिन बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।


