क्यों फैलाया जा रहा है तीसरे विश्वयुद्ध का डर जब अमेरिका चीन और रूस खुद नहीं चाहते जंग
दुनिया में युद्ध का डर जरूर है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 में बड़ी ताकतें जंग से दूर रहेंगी और हालात को नियंत्रण में रखकर चलेंगी।

पिछले कुछ महीनों से दुनिया में युद्ध का डर बढ़ा है। यूक्रेन में लड़ाई जारी है। गाजा में तनाव बना हुआ है। ताइवान को लेकर भी बयानबाज़ी होती रहती है। कई लोग तीसरे विश्वयुद्ध की बात कर रहे हैं। लेकिन कुछ बड़े विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि हालात डरावने जरूर हैं। लेकिन वैश्विक युद्ध जैसे नहीं हैं।
अमेरिका चीन और रूस जंग से क्यों बच रहे हैं?
जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट वेलिना चकारोवा का मानना है कि बड़ी ताकतें युद्ध नहीं चाहतीं। अमेरिका, चीन और रूस दुश्मन जरूर हैं। लेकिन बेवकूफ नहीं हैं। इन्हें पता है कि युद्ध से अर्थव्यवस्था टूटेगी। परमाणु खतरा बढ़ेगा। पूरी दुनिया अस्थिर हो जाएगी। इसलिए ये देश टकराव को सीमित रख रहे हैं।
क्या चीन 2026 में ताइवान पर हमला करेगा?
ताइवान इस समय सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि 2026 में हमला नहीं होगा। चीन दबाव बनाएगा। सैन्य अभ्यास करेगा। बयान देगा। लेकिन सीधा युद्ध नहीं करेगा। क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार टूट सकता है। सेमीकंडक्टर सप्लाई रुक सकती है। नुकसान बहुत बड़ा होगा।
क्या यूक्रेन युद्ध दुनिया को जंग में धकेल देगा?
यूक्रेन युद्ध चौथे साल की ओर बढ़ रहा है। कई बार आशंका जताई गई कि NATO और रूस आमने-सामने आ सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा नहीं होगा। परमाणु युद्ध की संभावना नहीं है। NATO सीधे युद्ध में नहीं उतरेगा। एक सीमित या रुका हुआ संघर्ष बन सकता है। बातचीत के रास्ते खुले रहेंगे।
क्या प्रॉक्सी युद्ध ही अगला रास्ता बनेंगे?
सीधा युद्ध न सही, लेकिन छोटे संघर्ष बढ़ सकते हैं। अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में अस्थिरता है। मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है। आर्कटिक और हिंद-प्रशांत में सैन्य हलचल तेज है। बड़ी ताकतें छोटे देशों के जरिए असर डालेंगी। इसे प्रॉक्सी वॉर कहा जाता है। यही नया तरीका बन सकता है।
क्या तकनीक भविष्य की लड़ाई तय करेगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध का चेहरा बदल रहा है। साइबर हमले बढ़ रहे हैं। अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा तेज है। AI अब बड़ा हथियार बन चुका है। चिप्स और सप्लाई चेन रणनीतिक ताकत हैं। अब लड़ाइयां केवल मैदान में नहीं होंगी। सिस्टम और नेटवर्क पर होंगी।
2026 में दुनिया को इससे क्या समझना चाहिए?
साफ संदेश यही है। डर बहुत है। लेकिन नियंत्रण भी है। 2026 में तीसरा विश्वयुद्ध नहीं होगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सैन्य खर्च बढ़ेगा। गठबंधन बदलेंगे। लेकिन बड़ी ताकतें सीमा नहीं लांघेंगी। सुर्खियां डर बेचती हैं। फैसले सोच से होते हैं। दुनिया फिलहाल जंग से एक कदम पीछे है।


